सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2004 के मेरिट लिस्ट में सरगुजा के दो उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इनमें सरगुजा के बतौली निवासी केशव गर्ग व अंबिकापुर निवासी शची जायसवाल शामिल हैं। केशव गर्ग को दूसरे प्रयास में 496 वां रैंक मिला है। शची जायसवाल को भी दूसरे प्रयास में 654 वां रैंक मिला है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी सिविल सेवा परीक्षा (CSE 2024) में कुल 1009 उम्मीदवारों का आईएफएस, आईएएस, आईपीएस एवं केंद्रीय सेवाओं के पदों के लिए चयन किया गया है। इनमें बतौली निवासी केशव गर्ग को 496वां रैंक मिला है। केशव गर्ग ने दूसरे प्रयास में यह सफलता अर्जित की है। पहले प्रयास में वे मात्र 1 अंक से चूक गए थे। कंप्यूटर इंजीनियर हैं केशव
केशव गर्ग ने कंप्यूटर से बीई हैं। केशव की प्राथमिक शिक्षा बतौली में हुई। उसके बाद दसवीं तक की पढ़ाई अंबिकापुर डीपीएस से पूरी की। केशव ने 12 तक की शिक्षा डीपीएस भिलाई से पूरी की और फिर LMCD इंजीनियरिंग कॉलेज, भोपाल से कंप्यूटर साइंस में बीई की डिग्री ली। बीई के साथ ही केशव ने पीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। केशव ने कहा कि बचपन से पिता को संघर्ष करते देखा तो उनसे संघर्ष की प्रेरणा मिली। परिवार को भरपूर सपोर्ट मिला, जिसने हौसला दिया। दूसरे प्रयास में सच्ची को मिली सफलता
शची जायसवाल को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। शची जायसवाल ने दौलत राम कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और जेएनयू दिल्ली से पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वे जेएनयू से पीएचडी कर रही हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ ही शची ने पीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। शची कि पिता मोहन जायसवाल कारोबारी हैं। वहीं माता अमिता जायसवाल हाउस वाइफ हैं। शची की प्राथमिक शिक्षा अंबिकापुर के केंद्रीय विद्यालय से एवं 9 वीं से 12 वीं की पढ़ाई होली क्रॉस कान्वेंट से पूरी की है। शची ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। पिता का सपना पूरा हुआ-केशव
केशव गर्ग ने कहा कि उनके पिता स्व. विनोद गर्ग का सपना था कि वे कलेक्टर बनें। यहीं से उन्हंे यूपीएससी की परीक्षा देने का लक्ष्य तय किया। विनोद गर्ग की करीब तीन वर्ष पूर्व हार्ट अटैक से निधन को गया। घर में उनकी मां हैं और बड़े भाई चंद्रकांत गर्ग हैं। चंद्रकांत गर्ग पेशे से व्यवसायी हैं।


