लुधियाना| क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) में बुधवार को 6वीं सीएचआरआईएसएमईडी वार्षिक अनुसंधान और शिक्षा संगोष्ठी केयर्स का आयोजन हुआ। तीन साल के बाद यह संगोष्ठी फिर से शुरू हुई। इसमें 150 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य अकादमिक शोध को बढ़ावा देना और उसका उत्सव मनाना रहा। इसमें डेंटिस्ट्री, फिजियोथेरेपी, एलाइड हेल्थ साइंस और गैर-नैदानिक विषयों से जुड़े प्रतिभागी शामिल हुए। अलग-अलग संस्थानों के स्टूडेंट्स, निवासी और संकाय सदस्य अपने शोध अनुभव सांझा करने के लिए इकट्ठा हुए। केयर्स 2025 में प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी दोनों कैटेगरी रखी गईं। प्रतिस्पर्धी वर्ग में मूल शोध, केस रिपोर्ट और केस सीरीज़ प्रस्तुत की गईं। गैर-प्रतिस्पर्धी वर्ग में परियोजना प्रस्ताव, क्लिनिकल ट्रायल और रेट्रोस्पेक्टिव स्टडी शामिल थे। इस कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. रिंचू लूंबा ने स्वागत भाषण दिया। प्रिंसिपल डॉ. जयराज डी पांडियन ने संगोष्ठी की दृष्टि और विरासत पर विचार रखे। पहले राउंड में पोस्टर प्रस्तुतियां हुईं। इनका मूल्यांकन प्रतिष्ठित संकाय सदस्यों ने किया। प्रत्येक प्रतिस्पर्धी श्रेणी से चार शीर्ष प्रतिभागियों को दूसरे राउंड में भेजा गया। दूसरे राउंड का निर्णय विशेषज्ञों के पैनल ने किया। इसमें डॉ. संजय डीक्रूज़, जीएमसीएच चंडीगढ़ के मेडिसिन विभाग प्रमुख; डॉ. आशीष भल्ला, पीजीआई एमईआर चंडीगढ़ में संक्रामक रोग इकाई के प्रभारी; और डॉ. परमप्रीत खरबंदा, पीजीआई एमईआर चंडीगढ़ में मिर्गी इकाई के प्रभारी शामिल रहे। वैज्ञानिक समिति की अध्यक्षता डॉ. अभिलाषा विलियम्स और डॉ. दीपशिखा कामरा ने की। इन्होंने शोध सामग्री के चयन और कार्यक्रम के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया। केयर्स की संयुक्त सचिव डॉ. रूबी सिंह ने आयोजन के समन्वय में अहम भूमिका निभाई। क्लब के अध्यक्ष आदित्य जैसन और रचनीत कौर ने संकाय के साथ मिलकर आयोजन और प्रबंधन में सक्रिय योगदान दिया। हर श्रेणी में शीर्ष प्रविष्टियों को पुरस्कार दिए गए। यह संगोष्ठी युवा शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शन, प्रतिक्रिया और पहचान का मंच बनी। केयर्स 2025 ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की लचीली सोच, दूरदर्शिता और सहयोग की भावना को फिर से साबित किया।


