भांकरोटा में डीपीएस कट के पास शुक्रवार सुबह हुए अग्निकांड के दौरान आग की लपटों से घिरे वाहनों के बीच 17.25 टन एलपीजी गैस से भरा दूसरा आईओसीएल का टैंकर भी फंसा हुआ था। आग की चपेट में आने से टैंकर का कैबिन और टायर जल चुके थे। डीजल टैंक में भी आग लग गई थी। सुबह 7 बजे ही गैस कंपनी के एक्सपट्र्स ने दूसरे गैस टैंकर के खतरे का अंदेशा जताया। टैंकर के ऊपर लगे ताप मीटर व दबाव मीटर खतरे के निशान पर पहुंच चुके थे। आग के बाहरी ताप से अंदर गैस का प्रेशर 100 PSI लेवल तक पहुंच चुका। कभी भी फट सकता था। अगर ऐसा होता तो भांकरोटा कस्बे तक तक भारी नुकसान होना तय था। क्योंकि इसकी जद में तीन पेट्रोल पंप भी थे। टैंकर के पीछे ही करीब 50 फीट दूर माचिस से भरा कंटेनर भी जल रहा था। यहां से 500 मीटर दूरी से ही गैस की पाइपलाइन भी है। कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र सोनी व डीसीपी वेस्ट अमित कुमार अलर्ट हो गए। सिविल डिफेंस व ग्रेटर निगम के फायरकर्मियों की टीम स्पेशल-26 को पूरी समस्या बताई। साहसी कर्मियों ने डटे रहने का फैसला लिया और टैंकर पर लगातार तीन घंटे तक पानी आैर फोम की बौछार टैंकर पर करते रहे। इनके प्रयासों से आखिर टैंकर का ताप व दबाव नियंत्रण में आ गया। इस दौरान आईओसीएल के अधिकारियों ने टैंकर को खाली करने के लिए आईओसीएल नसीराबाद से रेस्क्यू व्हीकल के साथ दो टैंकर मंगवाए। एक टैंकर में वैपर, जबकि दूसरे में लिक्विड भरा गया। 100 डिग्री ताप से सेफ टैंकर भी अंदर भरी गैस के प्रेशर फट जाता है एलपीजी एक्सपर्ट व राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के अध्यक्ष दीपक सिंह गहलोत के अनुसार एलपीजी टैंक बीआईएस नॉर्म्स के आधार पर बनाए जाते हैं। प्रत्येक टैंक को पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पेसो) से लाइसेंस लेना होता है। टैंक की थिकनेस आईएस 9618 1980 स्टैंडर्ड के अनुकूल इतनी अधिक होती है कि किसी हादसे में डेमेज होने के बावजूद फटता नहीं। इसमें भरी जाने वाली अधिकतम एलपीजी से दोगुना प्रेशर पर टेस्टेड होता है। यानी सामान्य या किसी भी असामान्य स्थिति में टैंक में दोगुना प्रेशर होने पर भी वह फटने की स्थिति में नहीं आता। यदि टैंक आग की लपटों के बीच डेढ़ से दो घंटे रखा रहे और 100 डिग्री तापमान उसके अंदर के प्रेशर को दोगुना से अधिक कर दे तब ही उसके फटने के कुछ चांस बनते हैं। टैंकर के अंदर का प्रेशर 100 व तापक्रम 40 डिग्री हो गया था उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा अमित कुमार ने बताया कि हादसे के समय टैंकर के अंदर का ताप 40 डिग्री-पीएसआई लेवल यानी दाब 100 के पास पहुंच गया था। इसके बाद टैंकर को ठंडा करने के लिए सिविल डिफेंस व दमकल कर्मियों की टीम को लगाया गया। तीन घंटे तक 18 दमकलों ने पानी व फोम की बौछार कर उसे काबू किया। आग के बाहरी ताप से अंदर गैस का प्रेशर 100 PSI पहुंचा, फटता तो भांकरोटा तक नुकसान तय था 100 मीटर दूर 3 पेट्रोल पंप और 500 मीटर दूर गैस की पाइप लाइन थी 50 फीट दूर था माचिस का कंटेनर भांकरोटा के जिस कट पर टैंकर और कंटेनर में हादसा हुआ था, उससे महज 100 फीट दूर ही 17.25 टन एलपीजी गैस से भरा दूसरा टैंक धधक रहा था। हादसे में ट्रक पूरा जल चुका था, लेकिन टैंक को नुकसान नहीं पहुंचा था, लेकिन 1 घंटे बाद इसका मीटर लाल खतरे के निशान तक पहुंच गया था।


