केंद्र सरकार ने राज्यों को लोन देने में कई शर्तें लगा दी हैं। चालू वित्त वर्ष में इन शर्तों का झारखंड सरकार के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना है। नई व्यवस्था के तहत झारखंड को 17 हजार करोड़ से अधिक लोन मिलना मुश्किल है। यह तय सीमा से करीब तीन हजार करोड़ रुपए कम होगा। चालू वित्तीय वर्ष में बाजार ऋण की सीमा 16,332 करोड़ और कुल ऋण सीमा 20 हजार करोड़ रुपए है। राज्य सरकार ने इस बाज के बजट में 20 हजार करोड़ लोन लेने की बात कही थी। इससे राज्य योजना ओर अन्य खर्चों को पूरा करना था। लेकिन नई शर्तों से सरकार के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। -शेष पेज 9 पर छोटे राज्यों का विकास नहीं होने देना चाहता केंद्र : किशोर झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा-केंद्र सरकार लोन पर शर्त लगा रही है। यानी वह झारखंड, मणिपुर, नगालैंड और मेघालय जैसे छोटे राज्यों का तेजी से विकास नहीं होने देना चाहती। झारखंड विकास के रास्ते पर चल रहा है। लोन लेने में एहतियात बरत रहा है। लगता है कि केंद्र के पास राजस्व संगह का दूसरा रास्ता नहीं बचा है। यह कदम राज्यों पर प्रहार है। सीएम हेमंत सोरेन देश से बाहर हैं। उनके आते ही आगे के कदम पर विचार करेंगे। अब ये शर्तें लगाईं बजट में 20 हजार करोड़ लोन लेने का है प्रावधान केंद्रांश व केंद्रीय सहायता की राशि राजकोष में जमा रहेगी तो केंद्रीय सहायता में केंद्र सरकार कटौती कर लेगी। मानेगी कि या तो उसके पास पैसे खर्च करने की क्षमता नहीं है, या लोन लेने की जरूरत नहीं है। जमा राशि के अनुरूप ऋण सीमा में कटौती या केंद्र से मिलने वाले आगे के पैसों में कमी की जाएगी। केंद्र ने उन पैसों को उसी वित्तीय वर्ष में खर्च करने की शर्त लगाई है। पूर्व में लिए गए गए बाजार ऋण, निगोसिएटेड ऋण , ईएपी ऋण, एनएसएसएफ ऋण के खर्चों का विवरण और ऋण रीपेमेंट का ब्यौरा भी केंद्र को नए ऋण लेने के प्रस्ताव के समय देना होगा। ऐसा नहीं करने पर ऋण स्वीकृति फंस सकती है। राज्य सरकार बोर्ड-निगमों के लिए जितनी राशि का ऋण गारंटी देगी, उसका 0.25% कम त्रण लेना होगा। अभी यह गारंटी करीब 30 हजार करोड़ है। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के खर्च का 1300 करोड़ से अधिक बकाया है। राज्य सरकार को इसे अक्टूबर तक देने को कहा गया है। ऐसा न करने पर इसका असर भी केंद्रीय सहायता और ऋण सीमा में कटौती पर पड़ सकता है।


