भास्कर न्यूज | हजारीबाग जंगल के संसाधनों का दोहन को कम करने और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ रहे दबाव को कम करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने जंगल से पांच किलोमीटर की परिधि में संचालित आरा मिल को हटाने का निर्देश दिया था। 2022 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोर्ट के निर्देश का अनुपालन करने के लिए वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को कहा था। नगर क्षेत्र (शहरी क्षेत्र) को उक्त निर्देश से बाहर रखा गया था। निर्देश के विपरीत हजारीबाग के जंगल क्षेत्र से सटे इलाके में आरा मिल अभी भी चोरी छिपे संचालित हो रहे हैं। इनको रोकने के लिए वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने लगातार छापेमारी कर अवैध आरा मिलों को कबाड़ दिया और संचालित करने वाले लोगों के विरुद्ध मुकदमा दायर किया। इसके बाद भी आरा मिल का संचालन बंद नहीं हुआ है। हजारीबाग के जंगल, पूर्वी और पश्चिमी वन प्रमंडल में बंटा हुआ है। पूर्वी वन प्रमंडल में गिरिडीह जिले का सरिया बगोदर प्रखंड भी आता है। कितने अवैध आरा मिल संचालित हो रहे हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्वी और पश्चिमी वन प्रमंडल के कर्मियों ने 2022 से लेकर 2025 तक 90 से अधिक बार छापेमारी कर अवैध आराम मिलों को कबाड़ा है। एक साल में औसतन 25 बार आरा मिल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। हजारीबाग जिले के चौपारण, इचाक, दारू, कटकमदाग, बरकट्ठा, बड़कागांव प्रखंड में चोरी छिपे आरा मिल संचालित किए जाने की सूचना है। जिले में अधिकतर आरा मिल के पर नहीं है लाइसेंस पूर्वी वन प्रमंडल हजारीबाग के डीएफओ विकास कुमार उज्ज्वल बताते हैं कि उनके प्रमंडल में नौ आरा मिल थे, उनमें से तीन ही चालू हैं। शेष की अनुज्ञप्ति का नवीकरण (रिनुअल) रोक दिया गया है। जिन आरा मिल संचालकों ने जंगल से 5 किलोमीटर की परिधि के बाहर आरा मिल स्थानांतरित करने का आवेदन दिया है, उसकी प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि विभाग ने हर जिले के लिए अधिकतम आरा मिलों की संख्या निर्धारित कर दिया है। उससे अधिक आरा मिल की अनुज्ञप्ति नहीं दी जा सकती।


