भास्कर न्यूज | बालोद एक ओर शासन, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बालोद जिले को 2027 तक मलेरिया मुक्त श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं दूसरी ओर हर माह मरीज मिल ही रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिले में एक जनवरी 2024 से मार्च 2025 तक 15 माह में मलेरिया के कुल 263 मरीज मिल चुके हैं। जिसमें पीएफ श्रेणी के 176 और पीवी वायवेक्स श्रेणी के 87 मरीज शामिल है। यह स्थिति तब है जब रोकथाम के नाम पर हर साल औसतन सरकार लगभग 40 लाख रुपए खर्च कर रही है। पिछले दो साल से डीडीटी छिड़काव और 4 साल से मच्छरदानी का वितरण बंद है। विभागीय अफसर तर्क दे रहे हैं कि संवेदनशील गांव कम है। इस वजह से शासन स्तर से ही डीडीटी सप्लाई बंद है। पिछले 10 साल मंे डीडीटी छिड़काव करने व मच्छरदानी बांटने सहित अन्य काम, गतिविधियां कराने में लगभग 4 करोड़ खर्च की जा चुकी है। फिलहाल की स्थिति मंे संक्रमण दर के हिसाब से जिले के 18 गांवों को मलेरिया संवेदनशील गांव की श्रेणी में रखा गया है। अफसरों का कहना है शासन स्तर से ही डीडीटी, मच्छरदानी उपलब्ध कराई जाती है। मच्छर का प्रकोप ज्यादा न बढ़े इसके लिए लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है, साफ-सफाई पर ध्यान दें, घर व आसपास गंदगी न होने दें। डॉ. जीआर रावटे, मलेरिया अधिकारी वर्ष 2022 में 57 गांव संवेदनशील थे, अब 18 सहायक जिला मलेरिया अधिकारी आरके सोनबोइर का कहना है कि शासन स्तर से जिले को 2027 तक मलेरिया मुक्त श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले की तुलना मंे अब कम गांव संवेदनशील है। डौंडी क्षेत्र का महामाया सहित दो गांव में मलेरिया मरीजों की संख्या ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सैंपल जांच के आधार पर जिले में तीन प्रकार के मच्छर पनप रहे है। जिससे 5 बीमारियों का खतरा है। वर्ष 2022-23 में जिले के 57 गांव को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। जो अब घटकर 18 हो गए हैं। छिड़काव के लिए मजदूर लगा नहीं सकते एक ओर मलेरिया मरीज मिल रहे है। वहीं दूसरी ओर विभागीय अफसर तर्क दे रहे है कि संवेदनशील गांव कम है। ऐसे में कम गांवों में डीडीटी छिड़काव के लिए मजदूर लगा नहीं सकते। लिहाजा दो साल से डीडीटी छिड़काव बंद है। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए पहले हर साल दो चरण में डीडीटी छिड़काव किया जाता था। अफसरों का तर्क है कि दो हजार की जनसंख्या मंे एक मरीज मिल रहे है तो स्थिति सामान्य मानी जाएगी। कई मापदंड के आधार पर मलेरिया को लेकर संवेदनशील गांव घोषित किया जाता है। 1. बालोद- बालोद ब्लाक में 15 माह मंे कुल 41 मरीज मिले हैं। जिसमें पीएफ श्रेणी के 36, पीवी श्रेणी के 4, मिश्रित श्रेणी के 1 मरीज शामिल हैं। 2. डौंडी- यहां सबसे ज्यादा कुल 115 मरीज मिले है.। जिसमें पीएफ श्रेणी के 82 और पीवी श्रेणी के 33 मरीज शामिल है। 3. डौंडीलोहारा- यहां कुल 84 मरीज मिले है। जिसमें पीएफ श्रेणी के 48 और पीवी श्रेणी के 36 मरीज शामिल हैं। 4. गुंडरदेही- यहां कुल 10 मरीज मिले हैं। जिसमें पीएफ श्रेणी के 7 और पीवी श्रेणी के 3 मरीज शामिल हैं। 5- गुरूर- यहां कुल 14 मरीज मिले हैं। जिसमें पीएफ श्रेणी के 3 और पीवी श्रेणी के 11 मरीज शामिल हैं। इस प्रकार जिले के सभी ब्लॉक में मरीज हैं।


