कोतमा क्षेत्र में आईपीएल सट्टा युवाओं के भविष्य से कर रहा खिलवाड़
कोतमा। आईपीएल का रोमांच जहां देशभर में खेल प्रेमियों को बांधे हुए है, वहीं कोतमा क्षेत्र में यह खेल अब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का जरिया बनता जा रहा है। कोतमा, जमुना, भालूमाडा सहित आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सट्टा कारोबार संचालित हो रहा है, जिसकी कमान कोतमा के दो भाइयों की युगल जोड़ी के हाथ में बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, भदरा कॉलरी इस सट्टा नेटवर्क का केंद्र बिंदु बन चुका है। यहीं से पूरे क्षेत्र में ‘फ्रेंचाइजी’ सिस्टम के तहत सट्टा कारोबार फैला दिया गया है। जमुना, कोतमा, भालूमाडा सहित कई क्षेत्रों में अलग-अलग एजेंटों के माध्यम से युवाओं को सट्टा खेलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे अवैध कारोबार को सत्ता पक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं का संरक्षण प्राप्त होने की बातें सामने आ रही हैं। यही वजह है कि पुलिस और प्रशासन की नजरें इस ओर जानबूझकर फेर ली गई हैं।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सट्टा नेटवर्क चलाने वाली युगल जोड़ी ने कोतमा, भालूमाडा और आसपास के क्षेत्रों में कई श्सट्टा प्वाइंटश् खोल रखे हैं। मोबाइल एप्स, व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों का सट्टा प्रतिदिन खेला जा रहा है। युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद इस सट्टेबाजी के जाल में सबसे ज्यादा फंस रही है क्षेत्र की युवा पीढ़ी। पिछले दो वर्षों पहले सट्टा कारोबार में फंसकर कोतमा का युवा कर्ज में फंसकर आत्महत्या तक कर लिया और उसके परिजन न्याय की गुहार लगाते रह गए जिसकी आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। कई युवाओं ने तो कर्ज में डूबकर घर तक गिरवी रख दिए हैं। स्कूल-कॉलेज छोड़कर सट्टा खेलने में लगे युवाओं के परिजन गहरे सदमे में हैं, लेकिन प्रशासन मौन साधे बैठा है। प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही अब सवाल यह उठता है कि आखिर कौन हैं वो लोग जो इस अवैध सट्टा कारोबार को चला रहे हैं? किसके इशारे पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही? और कब तक सत्ता की आड़ में कोतमा के भविष्य को गर्त में डाला जाएगा? जनता मांग रही है जवाब कोतमा, जमुना और भालूमाडा क्षेत्र की जनता अब सवाल पूछ रही है क्या युवाओं को सट्टा का जाल सौंप देना ही ‘विकास’ है? क्या सत्ता का मतलब सिर्फ संरक्षण देना है? क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है?


