पवित्र नगरी अमरकंटक में प्लास्टिक पॉलिथीन जब्ती की कार्रवाई
अमरकंटक। पवित्र नगरी अमरकंटक में मध्य प्रदेश प्रदूषण निवारण मंडल शहडोल एवं नगर परिषद अमरकंटक के संयुक्त तत्वाधान में अमानक स्तर एवं प्रतिबंधित पर्यावरण को प्रभावित करने वाली प्लास्टिक पॉलिथीन के उपयोग एवं उपभोग पर कार्यवाही करते हुए नगर के किराना एवं जनरल स्टोर तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों दुकानों पर छापा मार कार्यवाही करते हुए लगभग आधा दर्जन दुकानों में प्लास्टिक पॉलिथीन लगभग आधा किलो जब्ती की गई तथा इतने ही दुकानदारों पर चालान की कार्यवाही की गई। पवित्र नगरी अमरकंटक के व्यावसायिक कारोबारी दुकानदारों को प्लास्टिक पॉलिथीन के उपयोग उपभोग न करने की समझे दी गई कार्यवाही दल ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह पॉलिथीन पर्यावरण को प्रभावित करता है पशु पक्षी भी प्रभावित होते हैं साथ ही मानव जीवन का भी स्वास्थ्य प्रभावित होता है इस कारण पॉलिथीन बिल्कुल भी प्रयोग में ना लाएं तथा आने वाले ग्राहकों को समझाइए कि आवश्यक झोला एवं अन्य साधनों में सामग्री दें किसी भी समय कभी भी फिर से पॉलिथीन पकड़े जाने पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। इसी तरह कार्यवाही दल होटल एवं अन्य दुकानों में भी निरीक्षण किया गया तथा उन्हें भी पॉलिथीन के प्रयोग उपभोग पर दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया तथा पॉलिथीन का उपयोग न करने की समझाइस एवं चेतावनी दी गई। व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले दुकानदारों को स्पष्ट कहा गया कि किसी कठोर कार्यवाही किए जाने से बचें अन्यथा मजबूरन सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभियान दल में प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कनिष्ठ वैज्ञानिक बी एम पटेल उपयंत्री श्रेयस पांडेय प्रयोगशाला परिचारक सुभाष निगम, नगर परिषद अमरकंटक के मनीष विश्वकर्मा, बैजनाथ चंद्रवंशी शारदा मोगरे राजकुमार सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
विश्व के लिए प्लास्टिक एक समस्या
प्लास्टिक का सवाल समूचे विश्व के लिए अहम बना हुआ है। यह समस्या हमारे यहां ज्यादा गंभीर है। देश में जारी स्वच्छता अभियान के बावजूद प्लास्टिक युक्त कचरे से गांव, कस्बा, नगर, महानगर, राज्यों की राजधानियां और देश की राजधानी तक अछूती नहीं हैं। इसकी चपेट में सागर और महासागर भी आने से नहीं बच सके हैं। प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जानवरों के लिए तो काल बन चुका है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस बाबत न नगर वासी और न स्थानीय निकाय गंभीर हैं। इस कचरे के बोझ तले पृथ्वी इतनी दब चुकी है कि अब उसके लिए सांस लेना दूभर हो गया है।


