शैक्षणिक विकास और संस्थानों की मान्यता के लिए शोध परियोजनाएं जरूरी

भास्कर न्यूज। लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में विजेता शोध प्रस्ताव और बुनियादी पांडुलिपि लेखन की कला विषय पर सेमिनार हुआ। इसका आयोजन अनुसंधान निदेशालय ने किया। उद्देश्य था शोधकर्ताओं को प्रभावी शोध प्रस्ताव और पांडुलिपि लेखन का कौशल देना। डॉ. प्रकाश सिंह बराड़, निदेशक अनुसंधान ने विशेषज्ञ वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक विकास और संस्थानों की मान्यता के लिए शोध परियोजनाएं जरूरी हैं। वाइस चांसलर डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने प्रतिभागियों से चर्चा की। उन्होंने बजट नियोजन और अच्छे प्रस्ताव की अहमियत बताई। डॉ. गिल ने पैनल सदस्य के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि विभिन्न संगठन किस तरह वित्तीय सहायता देते हैं। शोधकर्ताओं को उन्होंने प्रेरित किया कि वे अनोखे शोध प्रस्ताव और गुणवत्तापूर्ण पांडुलिपियां तैयार करें। सेमिनार में कई पेशेवर विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल हुए। उन्होंने प्रभावी शोध प्रस्ताव तैयार करने के तरीके बताए। सेंटर फॉर वन हेल्थ के निदेशक डॉ. जसबीर सिंह बेदी ने बताया कि किन बिंदुओं से फंडिंग एजेंसियों का ध्यान खींचा जा सकता है। डॉ. राम सरन सेठी, अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान ने कहा कि शोधकर्ता अन्य संस्थानों के सहयोग से भी प्रस्ताव बना सकते हैं। उन्होंने कई जरूरी मुद्दों पर बात की। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय पशु विज्ञान जर्नल की पूर्व संपादक डॉ. अरुणा टी कुमार विशेष वक्ता रहीं। उन्होंने बताया कि शोध लेख को अच्छे जर्नल में स्थान दिलाने के लिए लेख स्पष्ट, संक्षिप्त और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने कई जरूरी बिंदुओं पर चर्चा की। डॉ. अरुणा ने उन सामान्य गलतियों का भी जिक्र किया जिनकी वजह से शोध प्रस्ताव अस्वीकृत हो जाते हैं।

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