दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन में एक हजार करोड़ से अधिक का काम चल रहा है, जिसमें ज्यादातर काम केवल झाझरिया निर्माण कंपनी को ही दिया गया है। CBI ने रेलवे के चीफ इंजीनियर को 32 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। वो दो साल से यहां पदस्थ है। आरोप है कि निर्माण कंपनी को काम दिलाने में जोन के कई बड़े अफसर भी शामिल हैं, वो भी CBI के निशाने पर हैं। रिश्वत कांड में ऐसे अफसर भी जांच के दायरे में हैं। दावा किया जा रहा है कि CBI उनकी भी कुंडली खंगाल रही है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन के तहत विश्वस्तरीय बनाने की योजना में 395 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से पुनर्विकास कार्य जारी है। यह ठेका झांझरिया निर्माण लिमिटेड को दिया गया है। ठेकेदार सुनील झांझरिया ही इस कंपनी के प्रमुख हैं। यह कंपनी रेलवे जोन में सबसे बड़ी मानी जाती है, जो रेलवे लाइन बिछाने, ब्रिज निर्माण और अन्य संरचनात्मक कार्यों में सक्रिय है। पांच साल पहले भी CBI ने दी थी दबिश
दरअसल, झाझरिया निर्माण लिमिटेड कंपनी ने रेलवे में ठेका लेकर काफी तेजी से अपना कारोबार फैला लिया। इस कंपनी का कारोबार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिमबंगाल सहित आठ राज्यों में करोड़ों रुपए का कारोबार है। करीब पांच साल पहले भी CBI ने इस कंपनी के दफ्तर में छापेमारी की थी। टेंडर घोटाला पर CBI की नजर
CBI सूत्रों ने बताया कि बिलासपुर रेलवे जोन में टेंडर में बड़े पैमाने पर घोटाला चल रहा है। इसकी जानकारी हाथ लगने पर CBI अफसरों ने पहले झाझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को दिए गए रेलवे के प्रोजेक्ट्स की जानकारी जुटाई। तब पता चला कि ज्यादातर बड़े निर्माण कार्यों का ठेका इसी कंपनी को दिया गया है। हाल के वर्षों में करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट इस कंपनी को आवंटित किए गए हैं। जिस पर घोटाले की आशंका होने पर CBI ने पुख्ता जानकारी जुटाकर छापेमारी की। पहले रेलवे ऑफिस और फिर ठेकेदार के दफ्तर में दी दबिश
CBI की टीम ने शुक्रवार को रेलवे से जुड़े निर्माण कार्यों में शामिल विभागों में छापेमारी की। इस दौरान टीम वहां भी गई, जहां चीफ इंजीनियर विशाल आनंद का ऑफिस है। वहां से जरूरी दस्तावेज जब्त किए गए, जिसमें झांझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को काम दिया गया है। यहां से डेटा कलेक्ट करने के बाद टीम झांझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के दफ्तर पहुंची। दफ्तर से जब्त किए दस्तावेज, कंपनी के डॉयरेक्टर को किया गिरफ्तार
जांच के दौरान टीम ने दस्तावेज खंगाले। यह कार्रवाई रेलवे प्रोजेक्ट्स में संभावित अनियमितताओं की जांच के तहत की गई है। बताया गया है कि झांझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को रेलवे के कई बड़े निर्माण कार्यों के ठेके मिले हैं। अधिकारियों ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के दफ्तर में दस्तावेजों की गहन जांच की और महत्वपूर्ण फाइलें व डिजिटल डेटा जब्त किया। इस दौरान कंपनी के डॉयरेक्टर को हिरासत में लिया गया और पूछताछ शुरू की। इस दौरान अधिकारियों से पूछताछ भी की गई। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हो सकती है। आरोपी अफसर की संपत्ति की जांच
रिश्वतखोरी करते पकड़े जाने के बाद अब CBI की टीम आरोपी चीफ इंजीनियर विशाल आनंद की संपत्ति की जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि दो अलग-अलग पदों पर रहते हुए आरोपी अफसर पर पहले भी अनियमितता बरतने के के आरोप लगे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि आरोपी चीफ इंजीनियर विशाल आनंद रांची डिवीजन में तीन साल तक इंजीनियरिंग विभाग में सीनियर डीईएन (कोऑर्डिनेशन) के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान उन पर विभागीय प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। कार्यकाल पूरा होने के बाद वे रांची में ही आरबीएनएल में दो साल तक पदस्थ रहे, यहां भी इसी तरह के आरोप लगाए गए। चीफ इंजीनियर ने भाई को बोला-एक आदमी पैसे लेकर आएगा
CBI के अफसरों ने बताया कि चीफ इंजीनियर ने झाझरिया निर्माण कंपनी के डॉयरेक्टर से रिश्वत का सौदा तय करने के बाद ये शर्त भी रखी थी कि 32 लाख रुपए को उसके पैतृक घर रांची में छोड़ना होगा। इसके लिए वो तैयार हो गया। जिसके बाद आरोपी इंजीनियर ने अपने भाई कुणाल आनंद को पहले ही बता दिया था कि एक व्यक्ति पैसे लेकर आएगा। जिसके अनुसार कंपनी का कर्मचारी शुक्रवार को पैसे लेकर रांची पहुंचा। उसने जैसे ही कुणाल को पैसे दिए, CBI ने उसे दबोच लिया। बिलासपुर से रांची तक लगी थी CBI
सूत्रों ने बताया कि रिश्वत कांड का सौदा तय होने से पहले ही CBI उनके पीछे लगी थी। पहले CBI को बिलासपुर में पैसे के लेनदेन होने की जानकारी मिली थी। लेकिन, जैसे ही पता चला कि उनकी मिटिंग 21 अप्रैल को हुई है और 25 अप्रैल यानी शुक्रवार को पैसों की डिलीवरी होने वाली है, तब एक दिन पहले ही CBI की टीम झांझरिया कंपनी के कर्मचारियों पर नजर रख रही थी। शुक्रवार को पता चला कि कर्मचारी पैसे लेकर रांची गया है, तब आनन-फानन में CBI की टीम कर्मचारी का पीछा करते हुए रांची पहुंच गई, जहां उसे रंगेहाथों पकड़ा गया, जिसके बाद बिलासपुर में छापेमारी कर दस्तावेज खंगाले गए।


