निगम ने रेवेन्यू बढ़ाने को लेकर प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी अप्रैल से ही तेज कर दी है। 25 दिन में 66.81 लाख रुपए सरकारी खजाने में पहुंच चुके हैं। सबसे ज्यादा सेंट्रल हलका में 16.70 लाख की रिकवरी हुई है, जबकि वेस्ट हलका 10.93 लाख रुपए के साथ सबसे पीछे रहा है। बता दें कि करीब 3400 प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों से यह रिकवरी की गई है। दरअसल, हर साल रिकवरी औसत निर्धारित टारगेट से अधिकतम 10 फीसदी ही रह जाता है लेकिन इस बार यह ग्रोथ 20 से 25 फीसदी तक पहुंचाने का प्लान बनाया गया है। ऐसे में 1 अप्रैल से ही 5 जोनों में रिकवरी तेजी से की जा रही है। बता दें कि साल 2025-26 का टारगेट भी अब तक निर्धारित नहीं किया जा सका है। 2024-25 में 40.90 करोड़ रुपए लक्ष्य निर्धारित किया गया था जो इस बार 45 करोड़ तक रखा जा सकता है। हालांकि इसमें भी अफसरों का अंदरखाते गेम किसी को समझ नहीं आया। चूंकि पूरे साल टारगेट 50 करोड़ रुपए बताया गया। 31 मार्च को कुल कलेक्शन 41.69 करोड़ हो पाया जिसके अगले दिन बताया गया कि टारगेट 40.90 करोड़ था। निगम घाटे में नहीं बल्कि अधिक रेवेन्यू अर्जित किया है। फिलहाल प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी में खुद को फायदे में दिखाने वाले निगम के पास यह जवाब नहीं है कि प्राइवेटाइजेशन की तरफ बढ़ने की क्या जरूरत है। जब रेवेन्यू लॉस नहीं जा रहा और सरकार ने इंस्पेक्टर राज खत्म करने को लेकर लोगों को रिटर्न भरने के लिए 2013-14 से खुद असेसमेंट भरने की सुविधा दी हुई है। टैक्स जमा नहीं कराने वाले डिफॉल्टरों को नोटिस भेजने के साथ ही सीलिंग की कार्रवाई भी होती है।


