महादेव बुक सट्टा एप की तरह कर्नाटक का नया एप कन्नड़ बुक (KA book) चल रहा है। इस एप के माध्यम से भी रोज लाखों रुपए का दांव लगाया जा रहा है। रायपुर का एक बुकी कन्नड़ बुक का पैनल लेकर दिल्ली के द्वारका में रहकर वहां छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन रैकेट चला रहा था। इसे ऑपरेट करने उसने कमीशन पर स्टाफ भी रखा था। रायपुर में पकड़े गए दो सटोरियों से पूछताछ के बाद शनिवार को पुलिस ने दिल्ली में छापेमारी कर वहां 6 सटोरियों को गिरफ्तार किया है। पैनल खरीदने वाले को भी पुलिस ने दबोच लिया है। ठगों की तलाशी के दौरान 17 मोबाइल, 22 पास बुक, 27 एटीएम, 3 लैपटॉप, 2 पावर एक्सटेंशन समेत 6 लाख के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। आरोपियों से 30 से ज्यादा खातों की बुक मिली है, उसकी जांच की जा रही है। पुलिस काे शक है कि कन्नड़ बुक महादेव सट्टा बुक से जुड़ा हो सकता है। इसकी तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अफसरों ने बताया कि महावीर नगर निवासी राकेश मदनानी उर्फ डाकी (36) का रायपुर में कारोबार है। कारोबार के आड़ वह सट्टा का नेटवर्क चलाने लगा। पहले वह महादेव सट्टा का पैनल चलाता था। पिछले डेढ़ साल से वह कन्नड़ बुक चला रहा है।उसने 20 लाख रुपए में पैनल खरीदा है। पता चला है कि कन्नड़ बुक के 120 से ज्यादा पैनल चले रहे हैं। राकेश पैनल चलाने के लिए एमपी जबलपुर के धर्मेंद्र राजानी (32), बिलासपुर के गगन तोलानी (30), घनश्याम मनुजा उर्फ बबलू (21), रायपुर के विकास तारवानी (32) और धमतरी के विवेक नरसिंहानी(32) को कमीशन पर रखा है। सभी को मार्च में दिल्ली द्वारका ले गया। वहां एक मकान किराए पर लिया। फिर वहीं से ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क चला रहे थे। रायपुर में जय मोटवानी और गौतम मदनानी काम देखते थे, जिसे पुलिस ने 10 दिन पहले गिरफ्तार किया था। कर्नाटक से आपरेट हो रहा सट्टा
पुलिस का दावा कन्नड़ बुक कर्नाटक से चल रहा है। इसे भी महादेव बुक के लोग ही चला रहे है। क्योंकि जांच एजेंसियां लगातार महादेव बुक पर कार्रवाई कर रही है। इसलिए एप का नाम बदलकर पैनल बांट रहे है। इसका डोमेन भी दूसरा है। इसमें दाव लगाने का तरीका महादेव बुक की तरह ही, सिर्फ नाम व डोमेन अलग है। इसमें आईडी पासवर्ड लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है। उसके बाद ही दाव लगा सकते हैं। कुछ बड़े बुकी भी इसमें शामिल
पुलिस का दावा है इसमें भी कुछ बड़े बुकी जुड़े हुए है। उन्होंने दूसरे के नाम से पैनल लिया है। उसे छत्तीसगढ़ के बाहर से चला रहे है। इसी तरह रेड्डी अन्ना, गजानंद, लॉट्स 360 समेत कई एप अभी चल रहे है। पुलिस सभी एप की जांच शुरू कर दी है। क्योंकि इन सभी एप के माध्यम से छत्तीसगढ़ में सट्टे का नेटवर्क चल रहा है।


