सिटी रिपोर्टर | बीकानेर बीकानेर। 538वें स्थापना दिवस पर शहर बीकाणा आपसी सौहार्द का एक बार फिर साक्षी बनेगा। नगर स्थापना दिवस के साथ ही शुरू हुई जाट और राजपूत जाति के एक साथ खाना खाने की परंपरा इसबार भी साकार होगी। 40 वर्षों तक बंद रही यह परंपरा पिछले साल ही वापस शुरू हुई है। आयोजन में जाट समाज की सात बिरादरी को निमंत्रण दिया जाएगा। रानी बाज़ार स्थित डेरा जय भवन में आयोजित होने वाला यह आयोजन स्थापना दिवस पर दूसरी बार शुरू की गई जाट-राजपूत समाज की पुरानी परंपरा को कायम रखने मेंं महत्वपूर्ण प्रयास होगा। इस कार्यक्रम में गोदारा जाट समाज के प्रतिनिधियों को मीठा खीचड़ा खिलाएंगे। अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित अपनत्व और समरसता की परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी गोदारा सहित जाट समाज की अन्य समस्त गोत्र के प्रतिनिधियों सहित राजपूत समाज एवं बीकानेर के गणमान्य नागरिक गण की उपस्थिति में जाट एवं राजपूत समाज के लोग एक दूसरे को मीठा खीचड़ा एवं गुड़ राबड़ी से खिलाकर मुंह मीठा कराएंगे। कार्यक्रम में राजपूत समाज सहित जनप्रति निधियों को भी निमंत्रण दिया गया है। राव बीका ने किले की शिला गोदारा जाट से रखवाई बीकानेर राज्य के संस्थापक राव बीका की गोदारा जाटों के मुखिया पाण्डु गोदारा से संधि एवं मित्रता थी। जनश्रुति है की बीकानेर के क़िले की नींव करणी माता द्वारा रखने के बाद इसकी शिला गोदारा जाट के हाथ से भी रखवाई गई थी। बीकानेर स्थापना के दिन राव बीका ने अपने मेहमानों को मीठा खीचड़ा जिमाया था। तब से आखा बीज पर राव बीका के वंशजों द्वारा गोदारा जाटों को मीठा खीचड़ा जिमाने की रीत प्रचलित हुई थी। बीकानेर के नए महाराजा का राजतिलक करने का अधिकार भी पांडु गोदारा के वंशजों को ही प्राप्त है। पिछले दशकों में यह रीति भी लगभग लुप्त हो गई थी। पिछले वर्ष अभिमन्यु सिंह राजवी ने लगभग चालीस वर्ष बाद इस रीत को पुनः स्थापित किया है।


