भास्कर न्यूज | बालोद रेलवे विभाग ने ताड़ोकी से रायपुर के बीच डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की शुरुआत कर दी है। स्पीड से लेकर अन्य प्रक्रिया को लेकर मंगलवार तक औपचारिक ट्रायल होगा। जिसके बाद बुधवार को रेलवे अंतिम निर्णय लेगा। हालांकि यह प्रक्रिया औपचारिकता ही है। हेड अॉफिस से इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने मंजूरी मिल गई है। रेलवे विभाग ने इसकी सूचना नहीं दी थी। सोमवार को यात्री जब रेलवे स्टेशन पहुंचे तब मालूम हुआ कि डीजल के बजाय अब इलेक्ट्रिक ट्रेन चलेगी, वह भी 20 साल पुरानी। दरअसल ट्रेन (रेक) का निर्माण अगस्त 2004 में हुआ है। जानकारी अनुसार रायपुर रेलवे मंडल की ओर से 6 इलेक्ट्रिक ट्रेन की डिमांड की गई थी। डिमांड के बाद रायपुर डिविजन को सिर्फ 2 ट्रेन मिली है। जिसमें एक को ताड़ोकी से रायपुर के बीच चलाने का निर्णय लिया गया है। बेशक डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने से फायदे होंगे लेकिन रेलवे विभाग को ज्यादा और यात्रियों को कम। डीजल की तरह इलेक्ट्रिक ट्रेन में भी 8 बोगी ही है। जबकि यात्री लंबे समय से 4 बोगी और बढ़ाने यानी कुल 12 बोगी वाली ट्रेन चलाने की मांग करते आ रहे हैं। बेशक इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने से रेलवे को डीजल के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। ताड़ोकी से भानुप्रतापपुर तक 90 किमी की स्पीड रेलवे विभाग की ओर से ट्रेन की लिमिट स्पीड प्रतिघंटा 110 किमी तय की गई है बावजूद सोमवार को 30 मिनट की देरी से दल्लीराजहरा, बालोद सहित जिले के अधिकांश स्टेशनों में 8 बोगी वाली इलेक्ट्रिक ट्रेन पहुंची। जिसके चलते गर्मी व उमस के बीच लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ा। ताड़ोकी से अंतागढ़, भानुप्रतापपुर तक ट्रेन की स्पीड को प्रतिघंटे 90 किमी, भानु से गुदुम तक 80 किमी, गुदुम से दल्ली तक 100 किमी, दल्ली से मरौदा तक 100-110 किमी और मरौदा से दुर्ग फिर रायपुर तक 110 किमी तय की गई है। अधिकतम लिमिट 110 किमी प्रतिघंटे रहेगी। बुधवार को अंतिम निर्णय लेगा रेलवे पुरानी ट्रेन के सवाल पर अफसर मौन दल्लीराजहरा के चीफ स्टेशन मास्टर जी. आर्य ने बताया कि डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने से कई फायदे होंगे। इंजन में खराबी नहीं आने व अन्य तकनीकी दिक्कत न होने से यह ट्रेन निर्धारित समय पर यात्रियों को पहुंचाएगी। बार-बार डीजल डालने की नौबत नहीं आएगी। जिससे समय की बचत होगी। खाली ट्रेन को रोजाना सुबह 8.30 बजे दल्लीराजहरा से ताड़ोकी के लिए रवाना किया जाएगा। वहां से निर्धारित समय में रायपुर के लिए रवाना होगी। हालांकि पुरानी इलेक्ट्रिक ट्रेन के संबंध में कोई भी कुछ कहने से बच रहें है। इस संबंध में जानकारी लेने भास्कर ने डीआरएम दयानंद से संपर्क किया लेकिन उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया। स्थानीय रेलवे स्टेशन के चीफ मास्टर से लेकर रायपुर रेल मंडल के अफसर भी इस संबंध में कुछ कहना नहीं चाह रहे हैं। िफलहाल शादी सीजन होने से ट्रेनों में भीड़ भी बढ़ गई है चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजू पटेल ने बताया कि ट्रेन का विस्तार पिछले 5-7 साल में 50 किमी से ज्यादा हो चुका है लेकिन बोगी 8 ही है। ऐसे में बोगी बढ़ाने की जरूरत है। भीड़ होने से पैर रखने तक की जगह नहीं रहती, लटककर सफर करने मजबूर होते हैं। इसके अलावा वर्तमान में दल्ली से दुर्ग तक सप्ताह में तीन दिन सोमवार से बुधवार तक ट्रेन चल रही है। बाकी 4 दिन गुरुवार से रविवार तक ट्रेन के पहिए थमे रहते हैं। ऐसे में सप्ताह के सभी दिन इस ट्रेन को चलाकर बिलासपुर व अंतागढ़ तक विस्तार किया जाए।


