अमृतसर | दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा वेरका बाइपास आश्रम में गुरु भक्ति से ओतप्रोत विशाल भंडारे का आयोजन किया। जिसमें स्वामी चिन्मयानंद ने अपने प्रवचनों में बताया कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य तभी पूर्ण होता है, जब हम गुरु चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य की किरणें कली को खिलाती हैं, उसी प्रकार सद्गुरु की कृपा एक साधक के अंतर्मन को प्रकाशित करती है। स्वामी ने समझाया कि प्रार्थना कोई मात्र बाहरी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आत्मा की वह मौन भाषा है, जो केवल गुरु के हृदय से जुड़कर ही पूर्ण होती है। इस मौके स्वामी चिन्मयानंद का प्रवचन सुनने के लिए कई लोग मौजूद थे।


