मार्क कार्नी बने रहेंगे कनाडा के PM:चुनाव जीतने के बाद बोले- US के साथ रिश्ते खत्म; उनके विश्वासघात से चोट पहुंची, ये सबक नहीं भूलेंगे

कनाडा में लिबरल पार्टी के मार्क कार्नी प्रधानमंत्री बन रहेंगे। आम चुनाव में उनकी पार्टी ने 343 में से 169 सीटें जीती हैं। ये 172 सीटों के बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 3 सीटें कम है। उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी सिर्फ 144 सीटें जीत सकी। पार्टी का नेतृत्व कर रहे पियरे पॉलिवर अपनी सीट भी नहीं बचा सके। वे लिबरल पार्टी के उम्मीदवार से हार गए। लिबरल पार्टी की जीत के बाद उसे चौथी बार सत्ता में बने रहने का मौका मिला है। ये पार्टी के लिए बहुत बड़ा जनादेश है, क्योंकि दो महीने पहले तक पार्टी के जीतने की उम्मीदें बहुत कम थीं। पॉपुलैरिटी रेटिंग में पार्टी को सिर्फ 25% पॉइंट मिले थे। जीत के बाद कार्नी ने पहले संबोधन में अमेरिका के साथ कनाडा के रिश्तों के अंत का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने विश्वासघात किया है और ये बात कनाडा कभी नहीं भूलेगा। मार्क कार्नी की पूरी स्पीच पढ़ें… अमेरिका के साथ हमारा पुराना संबंध, जो लगातार बढ़ती एकजुटता पर टिका हुआ था, अब खत्म हो चुका है। अमेरिका की ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी, जिस पर कनाडा ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद से भरोसा किया और जिसकी वजह से कई साल तक हमारे देश में समृद्धि रही, अब खत्म हो चुकी है। और यह हमारी भी नई सच्चाई है। हम अमेरिका के विश्वासघात के झटके से उबर चुके हैं, लेकिन हमें इस सबक को कभी नहीं भूलना चाहिए। अब हमें खुद का ध्यान रखना होगा। और सबसे जरूरी, हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना होगा। जब मैं राष्ट्रपति ट्रम्प से मिलूंगा, तो यह दो स्वतंत्र देशों के आगे के संबंधों पर चर्चा करने के लिए होगा। हम एक नया रास्ता तय करेंगे, क्योंकि यह कनाडा है और यहां जो होगा, वह हम तय करेंगे। हमें बड़े सपने देखने होंगे और उससे भी बड़े काम करने होंगे। हमें वो काम करने होंगे जो पहले असंभव माने जाते थे, और ऐसी गति से करने होंगे, जो इसके पहले की पीढ़ियों ने नहीं देखी होगी। अमेरिका ने जो हमसे छीना है, उससे कहीं ज्यादा हम खुद को दे सकते हैं। आने वाले दिन और महीने चुनौतीपूर्ण होंगे, और उसमें हमें कुछ त्याग करने पड़ेंगे। लेकिन हम अपने मजदूरों और व्यवसायों का समर्थन करेंगे और मिलकर ये त्याग करेंगे। खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह हारे, पार्टी को सिर्फ 7 सीटें मिलीं खालिस्तान समर्थक और न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के प्रमुख नेता जगमीत सिंह अपनी सींट हार गए हैं। नतीजे के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जगमीत सिंह रो पड़े। वे ब्रिटिश कोलंबिया की बर्नाबी सेंट्रल सीट पर लिबरल उम्मीदवार वेड चांग से हार गए। सिंह को लगभग 27% वोट मिले, जबकि चांग को 40% से ज्यादा वोट मिले। जगमीत ने अपनी सीट न बचा पाने के बाद इस्तीफा दे दिया। उनकी पार्टी को भी वोटों में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। पार्टी नेशनल पार्टी का स्टेटस भी खो सकती है, क्योंकि नेशनल पार्टी बने रहने के लिए कम से कम 12 सीटें जीतना जरूरी होता है। कनाडा में अक्टूबर में होने थे चुनाव, समय से पहले कराए गए वैसे तो कनाडा में आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2025 को चुनाव होने थे, लेकिन प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले महीने यह कह कर नए चुनाव का ऐलान किया था कि उन्हें ट्रम्प से निपटने के लिए मजबूत जनादेश चाहिए। 2015 से कनाडा के प्रधानमंत्री रहे जस्टिन ट्रूडो ने इस साल की शुरुआत में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद मार्क कार्नी को नया प्रधानमंत्री चुना गया था। कनाडा में प्रधानमंत्री का कार्यकाल सामान्यतः 4 साल का और अधिकतम 5 साल का होता है, लेकिन बहुमत खो देने पर या फिर पीएम चाहे तो समय से पहले संसद भंग कर नए चुनाव का ऐलान कर सकते हैं। कार्नी ने ऐसा ही किया। बैंकर और इकोनॉमिस्टक हैं मार्क कार्नी मार्क कार्नी इकोनॉमिस्ट और पूर्व केंद्रीय बैंकर हैं। कार्नी को 2008 में बैंक ऑफ कनाडा का गवर्नर चुना गया था। कनाडा को मंदी से बाहर निकालने के लिए उन्होंने जो कदम उठाए, उसकी वजह से 2013 में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने उन्हें गवर्नर बनने का प्रस्ताव दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड के 300 साल के इतिहास में वे पहले ऐसे गैर ब्रिटिश नागरिक थे, जिन्हें यह जिम्मेदारी मिली। वे 2020 तक इससे जुड़े रहे। ब्रेक्जिट के दौरान उनके फैसलों ने उन्हें ब्रिटेन में मशहूर बना दिया। ट्रम्प के विरोधी हैं कार्नी, टैरिफ वॉर को गलत ठहराया चुके कार्नी ट्रम्प के विरोधी हैं। उन्होंने देश की इस हालत का जिम्मेदार ट्रम्प को बताया है। उन्होंने फरवरी में बहस के दौरान कहा कि ट्रम्प की धमकियों से पहले ही देश की हालत खराब है। बहुत से कनाडाई बदतर जीवन जी रहे हैं। अप्रवासियों की संख्या बढ़ने से देश की हालत और खराब हो गई है। ट्रम्प की तरफ से कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान करने के बाद उन्होंने एक बयान दिया था, कनाडा किसी दबंग के आगे नहीं झुकेगा। हम चुप नहीं बैठेंगे हमें एक मजबूत रणनीति बनानी होगी, जिससे निवेश बढ़े और हमारे कनाडाई कामगारों को इस मुश्किल समय में सहायता मिले। भारत-कनाडा के रिश्तों को बेहतर बनाना चाहते हैं कार्नी कार्नी भारत और कनाडा के रिश्तों में आए तनाव को खत्म करना चाहते हैं। वे भारत से अच्छे रिश्तों को हिमायती रहे हैं। फरवरी में उन्होंने कहा था कि अगर वो कनाडा के प्रधानमंत्री बनते हैं तो भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को फिर से बहाल करेंगे। उन्होंने कहा- कनाडा समान विचारधारा वाले देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाना चाहता है और भारत के साथ संबंधों को फिर से बनाना चाहता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह- खालिस्तानी आतंकियों के मुद्दे पर मार्क कार्नी ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। भारत और कनाडा के बीच विवाद की वजह क्यों है खालिस्तान खालिस्तानियों के मुद्दे पर भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ साल से राजनीतिक विवाद चल रहे हैं। कनाडाई पीएम ट्रूडो कई बार भारत विरोधी खालिस्तान आतंकियों के लिए नर्म रुख दिखा चुके हैं। इसके अलावा भारत ने उन पर देश के आंतरिक मसलों में भी दखल देने का आरोप लगाया है। कुछ उदाहरण देखिए… ———————————– कनाडा से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारतवंशी रूबी ढल्ला कनाडा PM की रेस से बाहर:चुनावी खर्च में गड़बड़ी पर अयोग्य करार, बोलीं- मेरा सपोर्ट बढ़ता देख पार्टी घबराई भारतीय मूल की रूबी ढल्ला कनाडा में प्रधानमंत्री पद की रेस से बाहर हो गई हैं। लिबरल पार्टी ने शुक्रवार को उन्हें इस पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। इसी के साथ उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना खत्म हो गई है। यहां पढ़ें पूरी खबर… कनाडा को जासूसी गैंग से निकालने पर तुले ट्रम्प:पांच देशों के इस ग्रुप में दुनिया के सबसे खतरनाक जासूस, क्या है यह 5-EYES 5 देशों में अमेरिका और उसके सहयोगी कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं। फाइव आइज को दुनिया का सबसे ताकतवर इंटेलिजेंस नेटवर्क भी माना जाता है। इस अलायंस का सबसे बड़ा मकसद आतंकवाद को रोकना और नेशनल सिक्योरिटी के लिए काम करना है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

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