सिटी रिपोर्टर | रांची जीईएल चर्च में इस साल अक्टूबर में महिला पुरोहिताभिषेक के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिल्वर जुबली मनाई जाएगी। इसी के तहत मंगलवार को जीईएल चर्च के सेंट्रल काउंसिल, महिला संघ और जुबली कमेटी की ओर से महिला पुरोहितों और कैंडिडेट्स के लिए पहला एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन एचआरडीसी में किया गया। सेमिनार की थीम ‘आशा से भरभूर’ था। सेमिनार में पांचों डायसिस की लगभग 60 महिला पुरोहित और महिला संघ की अधिकारी मौजूद रही। चर्च सेक्रेटरी अमित लकड़ा ने बताया कि यह सेमिनार महिला पुरोहितों को एकजुट करने के लिए, बेहतर ढंग से कलीसिया की सेवा करने के लिए और वर्तमान परिस्थिति की चुनौतियों का सामना करते हुए कलीसिया को आगे कैसे बढ़ाए इन बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया है। लीगल एडवाइजर वेंकटेश गोपाल ने महिला पुरोहितों को संविधान और नीति नियम के बारे में जानकारी दी। जीईएल चर्च की स्थापना 2 नवंबर 1845 में हुई। तब से लेकर लगभग दो दशक तक चर्च में केवल पुरुष पादरियों ने ही सेवा दी। 26 अक्टूबर साल 2000 में 3 महिलाओं ने जीईएल चर्च में पादरी के रूप में दीक्षा ली। इनमें पादरी आशीषन कंडुलना, पादरी मेरियन मिंज और पादरी ईजाबेला बारला का नाम शामिल है। धर्मविधि मेन रोड स्थित क्राइस्ट चर्च में पूरी की गई थी। इन तीन महिला पादरियों में पादरी मेरियन मिंज की मृत्यु हो चुकी है। वर्तमान में लगभग 50 महिला पादरी पांचों डायसिस में सेवा दे रही हैं। 50 पास्टर कैंडिडेट है और कॉलेज में भी महिलाएं शिक्षा ले रही है। ^चर्च में महिला पादरियों का अभिषेक होना चाहिए। इनकी भागीदारी और बराबरी को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बाइबल में भी महिला द्वारा धार्मिक अगुवाई और सामाजिक सेवा की बात कही गई है। इस क्षेत्र में कुछ बाधाएं है, मिलकर इनका सामना करना होगा। -मॉडरेटर मार्शल केरकेट्टा


