सरगुजा में जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई दूध सागर सहकारी सेवा समिति के दूध सागर डेयरी में तीन करोड़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी पाई गई है। दूध सागर डेयरी का संचालन के लिए बनी समिति वर्ष 2023 में बंद कर दी गई है। इसके बाद अनाधिकृत रूप से सीईओ एवं संचालक द्वारा इसका संचालन कराया जा रहा था। सरगुजा कलेक्टर ने जांच के बाद मामले में एफआईआर के निर्देश नगर निगम आयुक्त एवं पशु चिकित्सा विभाग को दिया है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017-18 में महिला स्वावलंबन के लिए तत्कालीन कलेक्टर किरण कौशल द्वारा दूध सागर सहकारी सेवा समिति का गठन किया गया था। समिति को दूध डेयरी के संचालन के लिए स्टेडियम के बगल में दुकान का आबंटन किया गया था। समिति द्वारा लुंड्रा क्षेत्र के गांवों से दूध का संकलन कर अंबिकापुर में बेचा जाता था। इसमें दूध उत्पादकों को लाभांश भी देने का प्रावधान किया गया था। समिति से छीना व्यवसाय, लाभांश राशि में गड़बड़ी
सहकारी समिति के संचालन के लिए लमगांव की बीना कौशिक को अध्यक्ष, बटवाही की रीता यादव को सचिव एवं तारा पटेल को उपाध्यक्ष बनाया गया था। समिति का सीईओ दीपक सिंह को एवं दूध बिक्री के लिए मो. शाहीद अंसारी को सहायक रखा गया था।
समिति की महिलाओं ने आरोप लगाया कि मो. शाहीद ने अपने साथियों के साथ मिलकर दूध का व्यवसाय समिति की महिलाओं से छीन लिया। दूध की लाभांश राशि में भी गड़बड़ी की गई है। इसकी शिकायत सरगुजा कलेक्टर से की गई थी। जांच में मिली बड़ी गड़बड़ी, प्रशासन ने बंद कराई दुकान
मामले की जांच सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने कराई। जांच में पता चला कि महिला समिति वर्ष 2023 से बंद है। इसका संचालन अवैध रूप से नगर निगम के दुकान में किया जा रहा था। लाभांश राशि भी किसानों को भुगतान नहीं किया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन एवं निगम के दुकान में संचालित डेयरी को प्रशासन ने बंद करा दिया है। नगर निगम ने दुकान को आधिपत्य में लेते हुए उसमें ताला जड़ दिया है। मामले में सीईओ दीपक सिंह और संचालक मो. शाहीद अंसारी के खिलाफ एफआईआर के निर्देश कलेक्टर सरगुजा ने पशु चिकित्सा विभाग एवं नगर निगम को दिया है। तीन करोड़ से अधिक की मिली है गड़बड़ी-कलेक्टर
सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने बताया कि समिति के संचालन में अनियमितता की शिकायत पर जांच कराई गई। दूध सागर सहकारी समिति वर्ष 2023 से बंद है। इसके बाद इसका अवैध रूप से संचालन किया जा रहा था। दूध उत्पादक किसानों की राशि में करीब 3 से 4 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पाई गई है। निगम आयुक्त और पशु चिकित्सा विभाग को कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।


