भगवान शिव का स्वरूप मनुष्य को शांत, सहज व सरलता का संदेश देता हैं। सरलता में ही ऐसा जादू है जो अच्छे-अच्छे विरोधियों को भी वह हथियार डालने को मजबूर कर देता है। जिस व्यक्ति का स्वभाव सरल होता है, वह बाहर-भीतर एक-जैसा ही होता है। वह न तो किसी भी प्रकार की बनावट, न छल-कपट करता है और न ही कुटिलता से किसी से व्यवहार करता है। लार्ड शिवा परिसर कुशवाह नगर में चल रही कथा में शनिवार को संत मुकेशानंद पुरी जी महाराज ने भगवान शिवपुराण कथा में यह बात कही। आयोजन समिति के सयोजक आकाश पटेल, रमेश पटेल ने बताया कि संतश्री ने कथा में भगवान गणेश जन्म प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती एक दिन स्नान करने लगीं तो उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण फूंक कर उसे जीवन दे दिया। उसे आज्ञा दी कि बेटा मैं स्नान करने जा रही हूं। किसी को भी अंदर मत आने देना। गणेश माता की आज्ञा पालन करते हुए खड़े हो गए। कुछ देर बाद शिव स्वयं वहां आए तो गणेश ने उनको अंदर जाने से रोक दिया। इस पर भगवान शिव को क्रोध आ गया। उन्होंने बालक पर त्रिशूल से प्रहार करके उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। पार्वतीजी की विनय पर भगवान भोलेनाथ ने एक हाथी के बच्चे का शीश काट कर गणेश के धड़ से जोड़ा और उसे जीवन दान दिया। इस पार्वती पुत्र को देवों में अग्रणी स्थान देकर गणों का अधिपति बनाया गया। गणों का ईश होने से उन्हें गणेश कहा गया। पूजा में सर्वप्रथम गणेश का स्मरण किया जाता है ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से संंपन्न हों। व्यासपीठ का पूजन दीपक जैन प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी, सब इंस्पेक्टर शिवम ठक्कर, नरेंद्र बोरासी, डॉक्टर एनएल बिंजुवा, भरत पुरोहित, भरत साहू, राधेश्याम जामले, सावन खटवा, अमित बडोला, विजय दुबे ने किया। कथा में इंदौर पुलिस की ओर से सब इंस्पेक्टर शिवम ठक्कर ने भक्तों को साइबर की सिख देते हुए ऑनलाइन फ्राड, डिजिटल अरेस्ट से बचने के उपाय बताए। इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कथा पंडालों में महंगे आभूषण न पहनें व पंडाल में शांति व धैर्य रखें, जल्दबाजी न करें, यही भगदड़ का कारण बनती हैं। महिलाओं का सम्मान करें।


