जोधपुर में 2 साल पहले शुरू किया नकली-नोटों का ट्रायल:फोटोकॉपी चला चुके, पकड़ में भी आए थे; कारखाना खोलकर लाखों की करेंसी खपाने का अंदेशा

जोधपुर में नकली नोट छापने वाली गैंग से पूछताछ में नए खुलासे हो रहे हैं। मंडोर मंडी परिसर के श्रीराम ब्लॉक में एक दुकान के ऊपर कमरा किराए पर इसलिए लिया, क्योंकि पूरे परिसर में यही ब्लॉक सुनसान में है। जहां अमूमन आम लोग या दुकानदारों का इधर आना-जाना नहीं रहता है। यहीं पर जाली नोट छापने का कारखाना चलाने वाले शातिरों ने 2 साल पहले अपने इस धंधे का ट्रायल शुरू कर दिया था। शुरुआत में तो एक असली नोट की फोटोकॉपी करके चला भी लिया, लेकिन दूसरी कोशिश में पकड़े भी गए। इसके बाद इंटरनेट पर यू-ट्यूब और गूगल पर नकली नोट छापने के तरीके और उपकरणों के बारे में छानबीन की और कारखाना शुरू कर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह अब तक तकरीबन 25-30 लाख के जाली नोट छापकर खपा चुका है। 10 लाख के नोट का ऑर्डर मिला था पुलिस की अब तक की छानबीन में ये भी सामने आया कि शातिर श्रवण व्यास और बाबूलाल प्रजापत अलग-अलग लोगों से जाली नोटों के ऑर्डर भी लेते थे। कन्फर्म ऑर्डर मिलने के बाद ये शातिर दो दिन में तकरीबन 4 से 5 लाख रुपए के नोट छापकर इनकी कटिंग इत्यादि करके असली जैसी पैकिंग तक करके नोटों की गड्‌डी बनाकर सप्लाई करते थे। ऐसे ही एक व्यक्ति से ढाई लाख रुपए के बदले में 10 लाख के नोट का ऑर्डर मिला था और उसी को पूरा करने के लिए जाली नोट तैयार करने में जुटे थे। अब पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों बदमाशों ने अब तक किस-किस व्यक्ति को कितने नोट सप्लाई किए थे। 4 सीरियल नंबर के ही 1483 नोट, रंगीन टेप से बनाते पट्‌टी बदमाशों के अड्‌डे से पुलिस ने 500-500 के बंडलों में 7.50 लाख के जाली नोट बरामद किए थे। इन्हीं बंडलों की गहराई से छानबीन करने पर पता चला कि अधिकांश नोट सिर्फ चार सीरियल नंबर के ही थे। इनमें से 1483 नोटों पर नीचे की तरफ अंकित सीरीयल नंबरों में से 3DW390633 नंबर के 370 नोट, 3DW390635 नंबर के 366 नोट, 3DW390636 नंबर के 378 नोट और 3DW390639 नंबर के 369 नोट थे। जबकि, असली भारतीय मुद्रा में हर नोट पर अलग-अलग सीरियल नंबर छपा होता है। इतना ही नहीं, नोटों पर रंगी पट्‌टी बनाने में प्रयुक्त दो रंगीन टेप गट्‌टी भी मिली, जो जाली नोटों पर लगाकर उन्हें असली जैसा बनाया जाता था। इन्हें देखकर ही पुलिस को मौके पर ही इनके जाली होने की पुष्टि हुई। इसके बावजूद पुलिस ने रात को ही एफएसएल विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया। उस टीम ने नोट छापने में प्रयुक्त इंक बॉटल्स व अन्य सामग्री के साक्ष्य संकलित किए। कार्रवाई महामंदिर (जिला-ईस्ट) थाना क्षेत्र में, FIR सरदारपुरा (जिला वेस्ट) में उल्लेखनीय है कि मंगलवार देर रात पुलिस की छापेमारी में 7 लाख 50 हजार के नोटों के बंडल के साथ मूलतया नागौर के पांचौड़ी हाल मगजी की घाटी निवासी श्रवण व्यास (28) पुत्र राजेंद्र व्यास और नागौर के भावंडा में गोवा कलां हाल मंडोर वीरेंद्र नगर निवासी बाबूलाल प्रजापत (40) पुत्र हनुमानराम को गिरफ्तार किया गया था। । बुधवार को अवकाशकालीन कोर्ट से एक दिन का पुलिस रिमांड मिलने के बावजूद पुलिस की इन्वेस्टिगेशन पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में गुरुवार को पुलिस दुबारा दोनों आरोपियों को नियमित कोर्ट में पेश कर रिमांड मांगेगी। इससे पहले कार्रवाई के संबंध में पुलिस जिला ईस्ट के महामंदिर थानाधिकारी की ओर से नोडल थाना सरदारपुरा (पुलिस जिला वेस्ट) में एफआईआर दर्ज करवाई गई। गौरतलब है कि जाली मुद्रा मुद्रण, प्रकाशन अथवा वितरण से जुड़े मामलों में कानूनी कार्यवाही के लिए नोडल पुलिस थाना सरदारपुरा अधिकृत है। इसीलिए पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्राधिकार में होने वाले इस प्रकृति के मामले सरदारपुरा थाने में ही दर्ज किए जाकर जांच की जाती है। अनपढ़ किसान और फुटकर व्यापारी निशाने पर दोनों आरोपियों से पुलिस इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी ज्यादातर नकली भारतीय मुद्रा की खपत मंडोर कृषि उपज मंडी में ही करते थे। इसके लिए इनके निशाने पर रहते थे ग्रामीण इलाकों से आने वाले अनपढ़ किसान और फुटकर व्यापारी। पूछताछ में बदमाशों ने माना कि गांवों से आने वाले अनपढ़ किसान असली और नकली नोटों में अंतर आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं। इसी का फायदा उठाकर वे किसी न किसी बहाने से उन किसानों को जाली नोट थमाने में कामयाब हो जाते थे। नकली घी के केस में भी आ चुका श्रवण का नाम मंडोर मंडी में कार्रवाई के बाद पुलिस को कुछ व्यापारियों से पता चला कि श्रवण के खिलाफ पूर्व में नकली घी का केस भी हो रखा है। पुलिस ने इसकी पुष्टि के लिए नागौर पुलिस से श्रवण और बाबूलाल का रिकॉर्ड मंगवाया, लेकिन वहां ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली। सूत्रों के अनुसार उदयपुर में नकली घी के एक मामले में श्रवण की भूमिका सामने आई थी। वहीं, मंडोर मंडी के व्यापारियों से भी पता चला कि पूर्व में श्रवण की मंडी में फुटकार किराणा दुकान थी, लेकिन वह धंधा ढंग से नहीं चला, तो वह घी की ख्ररीद-बिक्री करने लगा। इसी चक्कर में उसने नकली घी का काम भी शुरू कर दिया था, लेकिन कुछ समय बाद ही उसका यह धंधा भी चौड़े आ गया। इसके बाद उसने रातो रात अमीर बनने के लिए जाली नोट बनाने का प्लान बना लिया। नकली नोटों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जोधपुर में नकली नोट की गैंग, 500-500 की गडि्डयां मिलीं:2 लाख में बेच रहे थे 10 लाख कीमत की फेक करेंसी, 2 आरोपी हिरासत में जोधपुर में नकली नोट छापने वाली गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपियों के पास 7.50 लाख की फेक करेंसी भी मिली है। बदमाशों ने किराए के कमरे में नोट छापने का पूरा सेटअप तैयार कर रखा था। (पढ़ें पूरी खबर)

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