भास्कर न्यूज | कवर्धा कवर्धा शहर में सफाई पर हर महीने औसतन 27 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। नगर पालिका के नुमाइंदे नियमित सफाई कराए जाने का दावा करते हैं। मानसून पूर्व उन दावों की पोल खुलकर सामने आई। गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे अचानक मौसम बदला। आंधी चलने के साथ डेढ़ घंटे तक तेज बारिश हुई। बारिश से शहर के कई इलाकों में जाम नालियों का गंदा पानी और कचरा सड़क पर बहने लगा। बारिश से नालियां ओवरफ्लो होने से शहर के दर्री पारा और करपात्री चौक बदहाल नजर आया। सफाई न होने से दोनों स्थानों पर कचरे से जाम नालियां ओवरफ्लो हो गई। नाली का सारा कचरा और काला व गंदा बदबूदार पानी सड़कों व गलियों में बहने लगा। इससे वहां के रहवासियों और राहगीरों को फजीहत झेलनी पड़ी। गाड़ियों के चलने से सड़क पर गंदा पानी छिटकने लगा। मानसून पूर्व कवर्धा शहर की सड़क की यह स्थिति रही तो बरसात में क्या होगा? इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होगा। { नालों की नियमित सफाई नहीं: शहर में नाले-नालियों की नियमित सफाई नहीं काई जाती है। नगर पालिका का स्वच्छता अभियान कुछ वार्डों तक रहता है। बरसात पूर्व गुरु नाला की सफाई पूरी नहीं हो पाई है। { ड्रेनेज सिस्टम में खामी: वार्डों में बने नाले-नालियों में तकनीकी खामी है। जहां नालियों की चौड़ाई अधिक होनी चाहिए, वहां ये संकरी है। इसलिए ये ओवरफ्लो होती है। रायपुर रोड, दर्री पारा में ये स्थिति अक्सर रहती है। {लोगों में जागरूकता नहीं: नालियों में लोग कचरा, प्लास्टिक की थैलियां सहित अन्य फालतू सामान डाल देते हैं, जिससे ये जाम हो जाते हैं। बारिश होने पर नालियां भर जाती है, तो ओवरफ्लो होती है। { निगरानी नहीं हो रही: नगर पालिका के अधिकारी बराबर निगरानी नहीं करते हैं। सफाई दरोगा के भरोसे शहर के सभी 27 वार्डों में सफाई का काम कराया जा रहा है। ड्रेनेज सिस्टम सुधारे नहीं जा रहे। शहर के सभी 27 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है। फिर भी नालियों में कचरा फेंका जा रहा है। पालिका में सफाई के लिए 8 ऑटो रिक्शा, 30 ई-रिक्शा, 3 जेसीबी, दो डंपर व 2 ट्रैक्टर है। कुल 64 सफाईकर्मी हैं। इनमें 46 प्लेसमेंट व 18 रेगुलर हैं। सफाई के लिहाज से शहर को 3 जोन में बांटा गया है। हर जोन में 9- 9 वार्ड आते हैं, लेकिन एक जोन में सिर्फ 7 कर्मचारी सफाई का काम करते हैं। गुरु नाला का अब तक पक्कीकरण नहीं किए वार्डों की छोटी नालियों का गंदा पानी गुरु नाला से होकर शहर के बाहर जाता है। करीब 3 किमी लंबे गुरु नाले की अधिकांश जमीन पर अवैध प्लाटिंग कर बेच दिए गए हैं। इस पर कई पक्के मकान भी बन गए हैं। गुरु नाला के पक्की करण के लिए पिछली सरकार में 1.22 करोड़ रुपए मंजूर हुआ था पर काम नहीं हुआ। वर्तमान में फिर से बजट स्वीकृत हुआ है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है।


