गुड्डे-गुड़ियों की शादी में बच्चे बने घराती-बाराती

भास्कर न्यूज | बारगांव अक्षय तृतीया पर बारगांव में बुधवार को अक्ती तिहार पूरे उल्लास और पारंपरिक रंग में मनाया गया। गांव की गलियों में बच्चों ने गुड्डे-गुड़ियों की शादी कर परंपरा को जीवंत कर दिया। कहीं हल्दी की रस्म चली, तो कहीं बच्चों की टोली नगाड़े, बाली और सूपा बजाते हुए बारात निकालती दिखी। पंच बिरेन्द्र साहू के नेतृत्व में रेशमी, वंदना सेन, वंशिका, पार्वती, योगिता, साधना साहू, भारती यादव, खिलेश्वरी, सोनम निषाद ने आयोजन में भाग लिया। टिकेश्वर, त्रिलोक, प्रेमचंद, हिमांशू, विभा और कान्हा भी शामिल रहे। इस दौरान दिन भर बाजार में अक्ति का रंग छाया रहा। मटकों की खूब बिक्री हुई। बच्चों के लिए लकड़ी की बाली और नकली आभूषण की दुकानें आकर्षण का केंद्र बनीं। वहीं गांव में सजे मंडप, तोरण, हल्दी की थाली, चावल से भरे कलश और बच्चों की उत्साह से भरी बारात ने माहौल को सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया। दान-पुण्य का भी विशेष महत्व रहा। गांव के मंदिरों में पंखे, मटके, छाते, वस्त्र और अन्न का वितरण किया गया। विष्णु-लक्ष्मी पूजन और सुंदरकांड पाठ के साथ लोगों ने पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना की। आंगन में दूल्हा-दुल्हन बनाकर मंडप सजाया सुबह से ही घरों में चहल-पहल रही। लोगों ने जल से भरे मटके, पंखे, अन्न और वस्त्र का दान किया। मिट्टी के घड़े में जल भरकर ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा भी निभाई गई। बच्चों ने गुड्डे-गुड़ियों को दूल्हा-दुल्हन बनाकर मंडप सजाया। खुद ही पुरोहित, बराती और घराती बने। पूरी शादी की प्रक्रिया निभाई। शादी के बाद भोज में खिचड़ी, गुड़ और दही का प्रसाद बांटा गया। इस आयोजन ने बच्चों में अनुशासन, सहयोग और संस्कृति की नींव रखी।

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