रायपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर उपजे विवाद को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। कमेटी की अध्यक्षता पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता लेखराम साहू को सौंपी गई है। समिति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष प्रेमचंद जायसी और सुनील माहेश्वरी को सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी पार्टी नेताओं, पार्षदों और स्थानीय संगठन से चर्चा कर पूरी जानकारी एकत्र करेगी और तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। पुराने नेता प्रतिपक्ष को हटाकर बागी पार्षद को दी गई जिम्मेदारी इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस पार्षद संदीप साहू, जिन्हें पार्टी की जिला कांग्रेस कमेटी की अनुशंसा पर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था, को अचानक हटा दिया गया। उनकी जगह आकाश तिवारी को नया नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया गया। हैरानी की बात ये रही कि आकाश तिवारी वही पार्षद हैं, जिन्होंने नगर निगम चुनाव के वक्त कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सूची से टिकट न मिलने पर बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा था। जीत के बाद वे कांग्रेस में दोबारा शामिल तो हो गए, लेकिन उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का फैसला कई नेताओं और पार्षदों को रास नहीं आया। बागी पार्षद को जिम्मेदारी देने पर पार्टी में मचा बवाल इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्षदों में नाराजगी खुलकर सामने आई। पहले कांग्रेस कार्यालय में नाराज पार्षदों ने बैठक की, फिर साहू समाज ने भी खुलकर विरोध जताया और रायपुर स्थित राजीव भवन के सामने प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि पार्टी ने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर बागी नेताओं को तरजीह दी है, जो गलत परंपरा की शुरुआत है। कांग्रेस पार्षदों के इस्तीफे से गहराया संकट पार्टी नेतृत्व द्वारा फैसले पर पुनर्विचार न किए जाने से मामला और गरमा गया। रायपुर नगर निगम में कांग्रेस के कुल सात पार्षद हैं, जिनमें से पांच पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। इससे पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्थिति और कमजोर हो गई है। कांग्रेस के पार्षद संदीप साहू, उपनेता प्रतिपक्ष जयश्री नायक, रोनिता प्रकाश जगत, दीप मनीराम साहू और रेणु जयंत साहू ने पार्टी से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इन सभी पार्षदों ने नेता प्रतिपक्ष बदलने के फैसले, नेतृत्व और स्थानीय स्तर पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अपने पद छोड़ने का निर्णय लिया है। इस्तीफा देने वाले पार्षदों की यह कार्रवाई नगर निगम में कांग्रेस को बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी की सियासी पकड़ और विपक्षी रणनीति दोनों पर असर पड़ सकता है। जांच कमेटी के गठन से थमेगी नाराजगी? अब जब तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई है, तो यह उम्मीद जताई जा रही है कि नाराज नेताओं की बात सुनी जाएगी और एक निष्पक्ष रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश कांग्रेस कोई ठोस निर्णय लेगी। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह जांच सिर्फ औपचारिकता रह जाएगी या वाकई पार्टी में नीचे तक फैली असंतोष को शांत कर पाएगी।


