नेताजी को नहीं मिले IPL के पास:NEET पेपरलीक माफिया ने राजस्थान से किसका नाम लिया; पूर्व मुखिया ने ली हारे हुए नेता की तस्वीर

राजधानी में हुए IPL मैच से क्रिकेट प्रेमी भले ही खुश हुए, लेकिन कई सत्ताधारियों के लिए ये परेशानी का सबब बन गए। पिछले दिनों एक जगह मंत्री और सत्ताधारी नेताओं के बीच चर्चा हो रही थी। मंत्री और नेताजी का मैच विमर्श लंबा चला। नेताजी का दर्द यह था कि उनके समर्थकों को छोड़िए परिवार वालों तक को पास नहीं मिले। मंत्री से यहां तक कह दिया कि इससे अच्छा तो मैच ही नहीं हो। मंत्री का भी यही दर्द था। संगठन से जुड़े एक बड़े नेताजी के परिवार को भी पास नहीं मिला। इस पूरी बातचीत के दौरान कोई और भी मौजूद था, जिसने सत्ताधारियों के पास में फेल होने का दर्द सुन लिया। पूर्व मुखिया के प्रति पुरानी लॉयल्टी की क्यों हुई चर्चा? प्रदेश की पूर्व मुखिया के दौरे किसी न किसी वजह से चर्चा में आ ही जाते हैं। हाल ही सीमावर्ती जिले में पूर्व मुखिया को एक नए मंदिर के कार्यक्रम में बुलाया गया। जिले के सांसद, मंत्री और संगठन मुखिया कार्यक्रम को सफल बनाने में दिन-रात जुटे रहे। पूर्व मुखिया का समर्थक वर्ग इस कार्यक्रम के लिए सक्रिय रहा। सियासी जगत में पूर्व मुखिया का यह कार्यक्रम एक खास वजह से चर्चा में है। सत्ता वाली पार्टी में जिस तरह के सियासी समीकरण हैं, उनमें भी पूर्व मुखिया के नजदीकी लोगों की लॉयल्टी अब तक बरकरार है। जिले के सांसद, मंत्री और जिला संगठन मुखिया ने तो यही साबित किया है कि इस जमाने में भी पुरानी लॉयल्टी बरकरार है। बाबा का हाथी के पैर में सबका पैर फाॅर्मूला सियासत में कब क्या समीकरण बदल जाएं, नेताओं का व्यवहार भी उसी के हिसाब से तय होता है। बाबा के नाम से मशहूर मंत्री के तेवर इन दिनों बदले हुए हैं। बाबा का ध्यान अब विरोध से गवर्नेंस पर शिफ्ट हो चुका है। बाबा के पास एक महकमा ऐसा है जो सब विभागों पर कंट्रोल करने की क्षमता रखता है, मतलब हाथी के पैर में सबका पैर वाला फाॅर्मूला। आपदा को कंट्रोल करने के लिए दर्जन भर विभाग जुटते हैं, बाबा ने यही नब्ज पकड़ी है। आपदा कंट्रोल के लिए अब स्टेट से लेकर जिलों तक बाबा ताबड़तोड़ बैठकें ले रहे हैं। सभी विभागों पर हुकूमत चलाने की फीलिंग ही तो चाहिए। नीट पेपरलीक माफिया से नेताओं-अफसरों का कनेक्शन बिहार में नीट पेपरलीक के मुख्य सरगना की सीबीआई गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ के बाद कई राज्यों तक तार जुड़ने के संकेत मिल रहे हैं। सीबीआई पूछताछ में अफसर, नेताओं के नाम भी लिए हैं। सीबीआई पूछताछ में राजस्थान से किस नेता अफसर का नाम लिया, इसे लेकर गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। कई नेता,अफसर सीबीआई पूछताछ का ब्यौरा जानने को बेताब हैं। फिलहाल राजस्थान से किसी नेता, अफसर के नाम को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई है लेकिन नेता, अफसरों के एक वर्ग को बिहार से कुछ कनेक्शन निकलने की संभावना दिख रही है, इसलिए लगातार इस पर निगाह रखे हुए हैं। पूर्व मुखिया ने शेखावाटी के हारे हुए नेताजी की फोटो क्यों ली? नेताओं की बैठकों से लेकर मेल जोल, गेट टूगेदर और आना-जाना निगाहों में रहता है। बड़े नेताओं के ऐसे जेस्चर बहुत कुछ कह जाते हैं। प्रदेश के पूर्व मुखिया मौजूदा सत्ताधारी पार्टी के पूर्व विधायक के यहां शादी समारोह में गए। पूर्व विधायक पहले पूर्व मुखिया की सरकार में रह चुके हैं। नेताजी का दल बदला है लेकिन दिल नहीं बदला। शादी में पूर्व मुखिया की टीम का मजमा जुट गया। पूर्व मुखिया मजमे को जुटा देख अपना मोबाइल निकालकर क्लिक करने से नहीं चूके। शेखावाटी के हारे हुए नेताजी का फोटो क्लिक करते हुए पूर्व मुखिया ने मजाकिया लहजे में कहा कि आपकी फोटो तो रखनी ही पड़ेगी। अब इस जेस्चर के भी मायने हैं। वैसे, जानकार कह रहे हैं इसे डिकोड करने में वक्त लगेगा। विपक्षी विधायक ने कलेक्टर के खिलाफ कौन से सबूत जुटाए? पूर्वी राजस्थान के चर्चित जिले के कलेक्टर इन दिनों विपक्ष के एक विधायक के निशाने पर हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद काफी आगे बढ़ गया है। विपक्षी विधायक पिछले दिनों बड़े नेताओं की बैठक में थे। बैठक के बाद अनौपचारिक चर्चा में भी कलेक्टर का जिक्र आया। विधायक ने सीनियर नेताओं के सामने कलेक्टर को सबक सिखाने की बात कही। विधायक ने कानूनी प्रावधान भी गिनाए, कलेक्टर को कानूनी सबक सिखाने की व्यूह रचना भी बताई। अब जल्द ही मामला हाईकोर्ट में ले जाने की तैयारी है। विधायक ने कलेक्टर के खिलाफ काफी सबूत जुटाने का भी दावा किया है। सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें पार्टी में ज्यादा पीने वाले IAS को छाछ की सलाह:नेताजी के बेटे को पैदल जाना पड़ा स्टेडियम; विधायकों ने नहीं लगाई मुखिया की फोटो

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