राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स, जहां हर दिन करीब 7 हजार लोग (मरीज व उनके परिजन) इलाज के लिए पहुंचते हैं, अब पानी की गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। छतों पर लगी सीमेंटेड और प्लास्टिक टंकियों में जो पानी जमा है, वह अब खुद बीमारी का कारण बनता दिख रहा है। पानी काला और हरा दिखाई दे रहा है, जिससे बदबू आती है। मरीजों के परिजन उसका उपयोग करने से डरते हैं। जानकारी के अनुसार, रिम्स में 10 से अधिक सीमेंटेड टंकियां हैं, जिनकी क्षमता 10 से 12 हजार लीटर है। इसके अलावा, अलग-अलग इमारतों में 40 से अधिक प्लास्टिक की टंकियां लगी हैं। इनमें से अधिकतर में ढक्कन तक नहीं हैं। गंदगी की परतें, काई और बदबूदार पानी साफ इशारा कर रहे हैं कि वर्षों से इनकी सफाई नहीं हुई। रिम्स में हर दिन रहते हैं 7 से 10 हजार लोग रिम्स में एक समय में करीब 2 हजार मरीज भर्ती रहते हैं और रोजाना ओपीडी में 2200 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। एक मरीज के साथ औसतन एक या दो परिजन होते हैं। यानी रोजाना 7 से 10 हजार लोगों की उपस्थिति रहती है। ऐसे में पानी की खपत लाखों लीटर प्रतिदिन तक पहुंचती है। बावजूद इसके पानी की क्वालिटी पर कोई ध्यान नहीं। सफाई कराई गई है, फिर से हो रहा काम रिम्स पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता सचिंद्र मोहन झा ने कहा कि सभी टंकी की नियमित सफाई कराई जाती है। एक साल में दो बार सफाई होती है। दूसरे फेज की सफाई कुछ दिन पूर्व शुरू हुई है। चूंकि रिम्स में पानी की खपत अधिक है और सप्लाई पानी आता है, ताे संभव है कि टंकी गंदी हो। लेकिन विभाग नियमित रूप से जांच कराता है। जांच कराई जाएगी, सफाई की जिम्मेदारी पीएचईडी की रिम्स के पीआरओ डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि पानी की टंकी के साफ- सफाई और मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी पीएचईडी विभाग की है। विभाग द्वारा हर छह माह के अंतराल में सफाई करने की बात कही गई है। बावजूद इसके अगर गंदगी की शिकायत है तो सभी टंकियों की जांच कराई जाएगी। भास्कर रिपोर्टर की आंखों देखी भास्कर रिपोर्टर ने खुद रिम्स की कई टंकियों का निरीक्षण किया। सीमेंटेड टंकियों में काई की मोटी परत जमी थी। पानी का रंग हरा और काला पड़ चुका था। कई टंकियों में तो अंदर झांकते ही बदबू आ रही थी। प्लास्टिक टंकियों में ढक्कन भी नहीं थे और अंदर मच्छर, कीड़े-मकोड़े और गंदगी दिखाई दे रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक गंदा पानी पेट संबंधी रोग, डायरिया, स्किन इन्फेक्शन और फंगल डिजीज का कारण बन सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों के लिए यह और भी खतरनाक है। खासकर सर्जरी वाले मरीजों को गंभीर इन्फेक्शन का खतरा रहता है, क्योंकि रिम्स में अधिकतर गंभीर रोगी ही भर्ती रहते हैं।


