भास्कर न्यूज| जांजगीर छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग द्वारा जारी युक्तियुक्तकरण नीति एक बार फिर शिक्षकों के विरोध का कारण बन गई है। अगस्त 2024 में जारी इस नीति को बिना किसी संशोधन के दोबारा लागू कर दिया गया है, जिससे प्रदेशभर के शिक्षकों में असंतोष की लहर दौड़ गई है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इसे पूरी तरह से दोषपूर्ण और अव्यवहारिक बताया है और तत्काल इस पर पुनर्विचार की मांग की है। टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि अतिशेष शिक्षकों के समायोजन की मंशा तो सही है, लेकिन जिन शालाओं में निर्धारित पदों से अधिक शिक्षकों की पोस्टिंग की गई, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हांकित कर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों की कोई गलती नहीं है क्योंकि उनकी नियुक्ति और पदस्थापना विभागीय अधिकारियों द्वारा की गई है। अतिथि शिक्षक को मुक्त रखे जाने से नाखुश जिस शाला में अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, उन्हें अतिशेष से मुक्त रखा जाना आपत्तिजनक है। स्कूल शिक्षा विभाग भविष्य में भी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में एकतरफा आदेश निर्देश जारी करने से पहले कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर सर्वसम्मत व प्रभावी कदम उठाए। तमाम विसंगति को देखते हुए तत्काल जारी युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पर रोक की मांग की गई है। मांगे पूरी नहीं होने पर आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। {एक ही परिसर में शालाओं के एकीकरण से शैक्षणिक व्यवस्थाएं बाधित होंगी और नियंत्रण कमजोर होगा। इससे शिक्षण गुणवत्ता में गिरावट आने की पूरी आशंका है। {प्रधान पाठक के पद को समाप्त किए जाने से शिक्षकों की पदोन्नति की संभावनाएं 50% तक कम हो जाएंगी, जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के भी विरुद्ध है। {पदों में कटौती से आने वाले वर्षों में शिक्षकों की भर्ती रुकेगी, जिससे प्रशिक्षित बेरोजगारों के लिए अवसर सीमित होंगे। {जहां नियमित शिक्षक अतिशेष माने जा रहे हैं, वहीं अतिथि शिक्षकों को युक्तियुक्तकरण से बाहर रखा गया है, जिससे असंतुलन हो रहा है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि 2008 के सेटअप को पुनः लागू किया जाए जिसमें प्राथमिक शालाओं में न्यूनतम एक प्रधान पाठक और दो सहायक शिक्षक, वहीं मिडिल स्कूलों में एक प्रधान पाठक और चार शिक्षक का प्रावधान था। यह संरचना व्यावहारिक और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी, जिलाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह सहित कई ब्लॉक अध्यक्षों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि इस नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए।


