मां से मिला बलराम को नया जीवन:निजी अस्पताल में एक माह तक निशुल्क इलाज, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत हृदय का ऑपरेशन किया

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य यानी मां योजना पांच वर्षीय बलराम को नया जीवन दे गई। उसे उदयपुर के एक निजी अस्पताल में एक माह तक निशुल्क इलाज के बाद राहत मिली। बलराम छोटी सरवन क्षेत्र के खोरीपाड़ा गांव का है। उसके पिता रामा टेलरिंग का काम करते हैं। बलराम को एक दिन तेज बुखार होने पर उसके पिता छोटी सरवन आयुष्मान आरोग्य मंदिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां पर खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मुकेश मईड़ा स्वयं ओपीडी देख रहे थे। उन्होंने बच्चे की जांच की तो हार्ट डिजिज होने का संदेह हुआ। उन्होंने बलराम को हार्ट के डॉक्टर से दिखाने की सलाह दी। विशेषज्ञ ने कहा, तुरंत भर्ती की जरूरतबलराम के पिता रामा को कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाने गए। वहां पर तुरंत भर्ती करने के लिए कहा, लेकिन वह पुनः छोटी सरवन लौट आए। उन्होंने बीसीएमओ डॉ मुकेश मईड़ा से मुलाकात की। डॉ मईड़ा ने जनआधार कार्ड के माध्यम से मां योजना में पंजीकृत होने या ना होने की जानकारी ली। इस पर परिवार पंजीकृत पाया गया। इस पर डॉ मईड़ा ने गीतांजली अस्पताल में बातकर बलराम को मां योजना में भर्ती करवाया। यहां पर चिकित्सकों ने एक माह तक भर्ती कर निशुल्क इलाज किया। जन्मजात हार्ट की बीमारी को ऑपरेशन से ठीक किया। वर्तमान में बलराम स्वस्थ है। उसके पिताजी ने निशुल्क इलाज होने पर राज्य सरकार का आभार जताया। बलराम अब स्कूल भी जा रहा है। बलराम के पिता रामा ने बताया कि ऑपरेशन कितने का हुआ, यह तो बताया नहीं, लेकिन स्टाफ द्वारा कहा जा रहा था कि लगभग पांच लाख रूपए का फायदा इस योजना से हुआ। जानिए जन्मजात इस विकृति कोछोटी सरवन बीसीएमओ बताते है कि टेट्रोलॉजी ऑफ फेलोट-एक जन्मजात ह्रदय में विकृति है। सामान्य भाषा मे बोला जाए तो एक साथ ह्रदय के तीन वाल्व में विकृति और एक दो अन्य विकृति रहती है। जिसमंे मुख्य लक्षण जिसमें पीड़ित बच्चों में हृदय के ब्लड सप्लाई अच्छे से नहीं कर पाने के कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है। जिससे हाथ पांव और शरीर में नीलापन आ जाता है बच्चों को चलने में दिक्कत होती है। थकान महसूस होती है और बार-बार बीमार होता है। इनका कहना हैमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एचएल ताबियार ने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में 1800 से अधिक पैकेज शामिल है। पंजीकृत परिवारों को 25 लाख रूपए तक का निशुल्क उपचार मिल रहा है। इसके लिए कोई भी परिवार निशुल्क श्रेणी में नहीं होने पर निर्धारित शुल्क जमा कराकर पंजीकृत हो सकता है। यहां तक की सरकार ने अब इसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए 73 डे केयर पैकेज भी शामिल किया है।

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