शिअद प्रधान सुखबीर बादल का PM को लिखा लेटर:कहा- पंजाब के पानी को लूटा जा रहा, पंजाबी खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे

हरियाणा को 8500 क्यूसिक अतिरिक्त पानी देने के केंद्र सरकार के निर्देश के बाद जल विवाद तेज हो गया है। आज (रविवार को) पंजाब शिअद के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में बादल ने प्रधानमंत्री को पानी के मुद्दे के बारे अवगत करवाया। सुखबीर ने लिखा- पंजाब के नदी जल को किसी न किसी बहाने से लूटा जा रहा है और इस कारण पंजाबी खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। साथ ही यह भी खुलासा किया है कि राजस्थान और हरियाणा हमेशा से पंजाब के नदी जल के अवैध लाभार्थी रहे हैं और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड द्वारा हरियाणा को अतिरिक्त 8500 क्यूसेक पानी जारी करने का हालिया निर्णय पंजाब के किसानों के साथ भेदभाव है। बादल ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे उन कारणों को खत्म करने का अनुरोध किया, जिनके कारण अतीत में बहुत सी अनावश्यक परेशानियां हुई हैं। बादल ने कहा कि (पंजाब की उचित शिकायतों ) के कारणों को दूर करना और दर्दनाक अतीत को दोबारा होने से रोकना ही राष्ट्र की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मेरे राज्य के साथ हो न्याय-सुखबीर उन्होंने कहा कि दरिया के पानी के मुद्दे पर पूरे देश में अंतरराज्यीय विवादों में लागू सिद्धांतों पर मेरे राज्य के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाबियों को कोई एहसान नहीं बल्कि उन्हें न्याय चाहिए। बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की निंदा करते हुए कहा कि उनके और उनकी पार्टी द्वारा के बार-बार यह वादा कि ‘‘हरियाणा और राजस्थान के हर खेत को पंजाब के दरिया के जल से सींचा जाएगा, जो कि पंजाब के असली दावे को कमजोर करता है। बादल ने कहा कि पंजाब के पास पानी की एक भी बूंद अतिरिक्त नहीं है। मुख्यमंत्री मान को इस मुद्दे की गंभीरता को समझे बिना, अपने दोहरेपन से आग से खेल रहे हैं। उन्हें अपने इस दोहरी बात को समाप्त करना चाहिए।’ सुखबीर बादल ने कहा कि हरियाणा ने नदियों के अपने हिस्से से ज्यादा पानी का उपयोग कर लिया है, जो उसे गलत तरीके से आवंटित किया गया, क्योंकि उस पानी पर उसका कोई अधिकार नही है। पंजाब के प्रति कृतज्ञ होने के बजाय वह बेशर्मी से और भी ज्यादा पानी की मांग कर रहा है। जल विवाद क्यों हुआ शुरू
हरियाणा लंबे समय से अतिरिक्त पानी की मांग कर रहा है, जबकि पंजाब का कहना है कि राज्य के पास पहले ही जल संसाधनों की भारी कमी है और सतलुज-यमुना लिंक (SYL) विवाद पहले से न्यायिक प्रक्रिया में है। ऐसे में हरियाणा को और जल देना पंजाब के हितों के खिलाफ होगा। वहीं BBMB द्वारा लिए जाने वाले किसी भी फैसले का सीधा असर पंजाब के किसानों और पीने के पानी की आपूर्ति पर पड़ेगा। इसलिए पंजाब सरकार ने यह मामला विधानसभा में लाने का निर्णय लिया है ताकि सभी पक्षों की राय लेकर सामूहिक निर्णय लिया जा सके। सियासी तापमान चढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम से पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से चल रहे जल विवाद में नई गरमाहट आ गई है। पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार जहां इसे राज्य के हितों से जुड़ा गंभीर मसला बता रही है, वहीं हरियाणा सरकार इसे केंद्र की सिफारिशों के अनुरूप न्यायोचित मांग कह रही है। अब सभी की निगाहें कल 5 मई को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि पंजाब सरकार इस पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है।

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