एक अभिनेता को किसी भी दायरे में नहीं बंधना चाहिए। उसे जीवन के अनुभवों को बढ़ाने के लिए घूमते रहना चाहिए। यह बात कार्यक्रम के आयोजक तिग्मांशु धूलिया से बातचीत में एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कही। वह रविवार को प्रयागराज में बज़्म-ए-विरासत लिटरेचर फेस्ट में पहुंचे। तिग्मांशु धूलिया ने अभिनेता संजय मिश्रा, अली फजल से बातचीत की। इस दौरान संजय मिश्रा ने कहा- एक अभिनेता के लिए सुनना बेहद आवश्यक है जबकि अली फ़ज़ल ने कहा कि पढ़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने मंटो का जिक्र करते हुए बताया कि एक अभिनेता को खुद से ईमानदार होना चाहिए। कार्यक्रम के अंतिम दिन मंच पर तिग्मांशु धूलिया ने नवाजुद्दीन से पूछा कि एक एक्टर इंटरनल परफॉर्मेंस करता है, लेकिन एक्सटर्नल परफॉर्मेंस कितना आवश्यक है और यह चरित्र को कैसे प्रभावित करता है? जवाब में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, यदि चरित्र की मांग हो, तो बाह्य प्रदर्शन ज़रूर करना चाहिए। वहीं संजय मिश्रा ने इस पर दिग्गज अभिनेताओं प्राण और गुलशन ग्रोवर का उदाहरण देते हुए बताया कि बाह्य प्रदर्शन सिनेमा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे प्रभावशाली ढंग से किया जाना चाहिए। संजय मिश्रा बोले- जीवन ही एक अभिनय है
संजय मिश्रा ने कहा-उनके लिए जीवन ही अभिनय है। अभिनेताओं से उनके संघर्ष के दिनों के बारे में सवाल किया गया। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि उनका संघर्ष कभी खत्म नहीं हुआ और उन्होंने अपनी पहली फिल्म सरफरोश का अनुभव साझा किया। अली फ़ज़ल ने अपनी पहली फिल्म एक थो चांस का ज़िक्र किया, जो कभी रिलीज़ नहीं हुई। इसके बाद उनकी पहली सफल फिल्म थ्री इडियट बनी। संजय मिश्रा ने कहा कि संघर्ष जीवन का अभिन्न हिस्सा है और यह हमेशा बना रहना चाहिए। तिग्मांशु के सवालों पर क्या बोले एक्टर तिग्मांशु धूलिया ने पूछा कि क्या सफलता सिर पर चढ़ जाती है? जवाब में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा- यह व्यक्तिगत बात है, लेकिन सफलता क्षणिक होती है। अभिनेता को अपनी ज़मीन से जुड़े रहना चाहिए। अंतिम सवाल में तिग्मांशु धूलिया ने पूछा कि क्या वे अपने जीवन में खुश और संतुष्ट हैं? अली फ़ज़ल ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे अपने जीवन में बेहद खुश हैं। उन्होंने साझा किया कि उनकी 5 महीने की बेटी उनकी खुशी का सबसे बड़ा कारण है। उनके इस व्यक्तिगत और दिल को छूने वाले जवाब पर दर्शकों ने ज़ोरदार तालियां बजाईं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा- संकट और रचनात्मकता साथ-साथ चलते हैं। संजय मिश्रा ने पूरी ईमानदारी से कहा कि वे अपने जीवन से खुश और संतुष्ट हैं। अभिनेताओं ने अपनी परफॉर्मेंस और अनुभवों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में इरफ़ान खान को श्रद्धांजलि देते हुए दर्शकों ने ज़ोरदार तालियों के साथ इस यादगार दिन को याद किया।


