सीतामढ़ी के हरचौका गांव में अवैध रेत खनन के विरोध में जनहित संघ ने तीन दिवसीय रेत सत्याग्रह किया। यह सत्याग्रह 2 मई से 4 मई तक चला। जनहित संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष संवर्त कुमार रूप के नेतृत्व में यह आंदोलन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कुछ हिस्से के लिए पट्टा मिलने के बाद ठेकेदार और रेत माफिया पूरी मवई नदी में 40 फीट तक की गहरी खुदाई कर रहे हैं। यह खनन कई नियमों का उल्लंघन कर रहा है। इनमें पर्यावरण प्रबंधन, एनजीटी के नियम और छत्तीसगढ़ गौण खनिज रेत अधिनियम शामिल हैं। खनन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं। इनमें ग्राम सभा की अनुमति का अभाव, पर्यावरण प्रभाव आकलन की कमी और स्कूल व सार्वजनिक स्थानों के निकट खनन शामिल है। साथ ही, मृदा क्षरण और जल प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। इस अवैध खनन से क्षेत्र के भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कुएं, तालाब, पोखर और नालों का अस्तित्व खतरे में है। पोकलेन मशीनों का उपयोग बिना उचित अनुमति के किया जा रहा है। यह पेसा एक्ट और खान-खनिज नियमों का भी उल्लंघन है। प्रशासन ने सत्याग्रह के दौरान अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्रामीण एकजुट होकर इस अवैध गतिविधि का विरोध कर रहे हैं।


