प्राइवेट परीक्षार्थियों को मध्यमा परीक्षा में शामिल कराने का सेंटर बना था

भास्कर न्यूज| हजारीबाग गुरु गोविंद सिंह रोड स्थित हजारीबाग जिले का एकमात्र राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय, हजारीबाग से इस साल मध्यमा (संस्कृत माध्यम से दशवीं) का परीक्षा फॉर्म नहीं भरा गया। अब यह विद्यालय पूरी तरह से बंद हो गया है। पिछले डेढ़ दशक से यह विद्यालय प्राइवेट विद्यार्थियों को मध्यमा की परीक्षा में शामिल करता आया है। डेढ़ दशक पहले ही इस विद्यालय में पठन पाठन बंद हो गया था। 2025 में वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने प्राइवेट विद्यार्थियों का फॉर्म भरना रोक दिया। प्रवीण रंजन ने बताया कि इस स्कूल में लंबे समय से छठी से दसवीं कक्षा में कोई नामांकन नहीं है। एक भी शिक्षक नहीं हैं। बिना रेगुलर विद्यार्थियों और शिक्षक के प्राइवेट विद्यार्थियों का यहां से परीक्षा फॉर्म भरा जाना दुर्भाग्यपूर्ण और गलत है। डेढ़ दशक पहले तक हुआ नामांकन : इस विद्यालय की स्थापना 1957 में हुई थी। इसमें छठी से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को संस्कृत माध्यम से पढ़ाया जाता था। यहां के विद्यार्थी झारखंड एकेडमिक काउंसिल से आयोजित होने वाली माध्यम की परीक्षा में शामिल होते थे। 2009 तक इस विद्यालय में नामांकन हुआ था। उसके बाद स्कूल के शिक्षक सह प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार गुप्त, महेंद्र पांडे और हरि किशोर त्रिपाठी की प्रोन्नति एजुकेशन एसडीओ और डीएसई के पद पर हो गई। उनके बाद यहां एक सहायक और एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी बचे। इन्होंने 2024 तक प्रभारी प्राचार्य के निर्देशन में प्राइवेट विद्यार्थियों को यहां से मध्यमा का फॉर्म भरवाया। राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय हजारीबाग। स्कूल में कर्मी के नाम पर मात्र चतुर्थ वर्गीय कर्मी मंजू देवी बचीं स्कूल में कर्मी के नाम पर एकमात्र चतुर्थ वर्गीय कर्मी मंजू देवी बची हैं। इनके पास कोई काम नहीं है। स्कूल में न विद्यार्थी है ना शिक्षक लेकिन मंजू देवी स्कूल के टाइम टेबल को फॉलो करती हैं। सुबह आकर स्कूल में बैठना और दोपहर में स्कूल को बंद कर निकल जाना इनकी दिनचर्या है। स्कूल में एक हेड मास्टर, आठ सहायक अध्यापक, एक लिपिक और एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी का पद स्वीकृत है। विभाग ने संस्कृत विद्यालयों में नियुक्ति बंद कर दिया है। इस बार हजारीबाग के विद्यार्थियों ने मध्यमा का परीक्षा फॉर्म कोडरमा और गिरिडीह से भरा है।

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