रजिस्ट्री सिस्टम बदला: ऑनलाइन मिलेगी जमीन की हिस्ट्री

भास्कर न्यूज | जांजगीर जमीन रजिस्ट्री में 10 नई व्यवस्थाएं लागू हो गई हैं। अब किसी को भी जमीन खरीदने के लिए पंजीयन कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। एक ही जमीन की दो बार रजिस्ट्री भी नहीं हो पाएगी। रजिस्ट्री होते ही ऑटोमोड में नामांतरण भी हो जाएगा। नई व्यवस्था के अनुसार संपत्ति खरीदने से पूर्व उसकी जांच खुद कर सकेंगे। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर खसरा नंबर से पूर्व की सभी रजिस्ट्री का ब्योरा देखा जा सकेगा। कोई जमीन खरीदनी है तो उसकी हिस्ट्री ऑनलाइन मिलेगी। साथ ही उसकी कॉपी डाउनलोड की जा सकेगी। आधार लिंक सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। पहले कई जगह किसी की संपत्ति कोई दूसरा बेच देता था। इससे वास्तविक मालिक की पहचान नहीं हो पाती थी। लेकिन नई व्यवस्था में आधार लिंकिंग से बायोमेट्रिक से मालिक की पहचान आधार डेटा बेस से की जाएगी। रजिस्ट्री की जानकारी के लिए पंजीयन कार्यालय में स्वयं या वकील के जरिए जानकारी मिलती थी। लेकिन अब संपत्ति खरीदने से पूर्व उसकी जांच खुद कर सकेंगे। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर खसरा नंबर से पूर्व की सभी रजिस्ट्री का ब्योरा देखा जा सकेगा। साथ ही उसकी कॉपी डाउनलोड की जा सकेगी। पहले ऐसी सुविधा नहीं थी। अब पंजीयन प्रणाली में पक्षकारों को वॉट्सएप से नोटिफिकेशन मिलेगा। रजिस्ट्री की प्रगति और रजिस्ट्री होने की रियल-टाइम जानकारी मिलेगी। पक्षकार को अब ऑनलाइन सर्च के साथ ही भारमुक्त प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर दिया जाएगा। पहले संपत्ति के दस्तावेज रजिस्ट्री के बाद रिकॉर्ड में दर्ज कराने होते थे। नामांतरण की कार्रवाई में पक्षकारों को लंबा समय लग जाता था। अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण भी हो जाएगा। घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन अब सरकारी संस्थाओं की जमीन या निर्माण की रजिस्ट्री ऑनलाइन करने की व्यवस्था है। पारिवारिक दान, हक त्याग आदि में पंजीयन फीस मात्र 500 रुपए लिए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही केशलैस पेमेंट की सुविधा भी शुरू होगी। इंटीग्रेटेड केशलैस पेमेंट सिस्टम से दोनों शुल्क का एकसाथ भुगतान हो सकेगा। डिजी-लॉकर की सुविधा शासन और निजी क्षेत्र की कई सेवाओं के लिए रजिस्ट्री पेपर की जरूरत होती थी। रजिस्ट्री दस्तावेज को भारत सरकार के डिजी-लॉकर सुविधा से सुरक्षित स्टोर किया जा सकेगा। डिजी-लॉकर के माध्यम से इसका एक्सेस और नकल प्राप्त की जा सकेगी। डिजी-डॉक बनाया गया है। इससे लोग उपयोग में आने वाले दस्तावेज बना सकेंगे।

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