छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में 10 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल धर्म आदिवासी समाज में वापसी की है। इनमें 3 बच्चे भी शामिल है। ये लोग पिछले 3-4 साल से ईसाई धर्म में फंसे हुए थे। जिन्हें प्रलोभन देकर, बहला फुसलाकर धर्म छोड़ने को मजबूर किया गया था। धर्म में वापसी करने लोगों ने अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से मानसिक बंधन में थे। वे बिमारी के इलाज के लिए गए थे। जहां उनसे प्रार्थना कराई गई। पीने के लिए पानी दिया गया। जिससे उस वक्त तो बीमारी ठीक हो गई लेकिन बाद में फिर से परेशानी बढ़ गई। जिसके बाद उन्होंने फिर अपने धर्म में आने की सोची। वहां उन्हें पढ़ने के लिए बाइबिल दी जाती थी जिसमें ईसाई धर्म के नियम होते थे। जिनसे उनका ब्रेन वॉश किया जाता था। बुखार ठीक करने का दावा गेंद लाल मरकाम ने बताया कि उनका बच्चा बुखार से पीड़ित था। इलाज के लिए गए थे। जहां उन्हें पानी देकर प्रार्थना कराई गई और लगाने के लिए तेल दिया गया। बच्चा ठीक हो गया। जिसके बाद वे उसी धर्म में चले गए। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चे बड़े होंगे तो शादी ब्याह में दिक्कत होंगी। इसलिए वापस आदिवासी समाज में आने की सोची। करीब देढ़ साल बाद अपने मूल धर्म में लौटने से उन्हें मानसिक शांति मिली है। उन्होंने अन्य लोगों से भी अपने मूल धर्म में वापसी की अपील की है। कमर दर्द, पेट दर्द ठीक करने का दावा राजेश मंडावी ने बताया कि वे कमर दर्द, पेट दर्द से परेशान थे। जहां उन्हें प्रार्थना कराई गई। उस वक्त तो ठीक लगा। लेकिन बाद में फिर से परेशानी बढ़ गई। जिसके बाद वे अपने समाज में आने की सोचे और 3 साल बाद लौट आए। घर वापसी पर समाज के लोगों ने किया स्वागत समाज प्रमुख रंगी लाल मरकाम ने बताया कि लालच देकर गांव के लोगों को ले जाया जा रहा है। जातिगत जनगणना जब होगी तब अपना समाज छोड़े हुए लोगों को दिक्कत होगी। इसलिए हम लोगों को जागरूक कर रहे है। विश्रामपुरी क्षेत्र के शंकर मरकाम भीमा मांडो गोंडवाना समन्वय समिति और रंगी लाल मरकाम संरक्षक गोंडवाना समन्वय समिति के नेतृत्व में सभी लोगों ने घर वापसी की है। समाज के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इन सभी का स्वागत किया। और भी कई लोग संपर्क में शंकर मरकाम भीमा का कहना है कि बस्तर संभाग में धर्मांतरण एक प्रमुख सामाजिक मुद्दा रहा है। यह क्षेत्र में नक्सलवाद के बाद दूसरी बड़ी चुनौती मानी जाती है। अभी भी हजारों लोग दूसरे धर्म में फंसे हुए है। आदिवासी समाज पिछले कई सालों से इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है। कई लोग सपंर्क में अभी भी बने हुए है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में लोग मूल वतन में वापसी करेंगे। …………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… रायपुर में धर्मांतरण को लेकर हंगामा-तोड़फोड़:एक घर में जमा थे 100 से ज्यादा लोग, बजरंग दल ने किया विरोध; पुलिस बल तैनात राजधानी में रायपुर में रविवार को धर्मांतरण को लेकर जमकर बवाल हुआ। टाटीबंध में धर्म परिवर्तन के आरोप में बजरंग दल ने जमकर तोड़फोड़ और हंगामा किया है। बजरंग दल का आरोप है कि, एक घर में करीब 100 से ज्यादा लोग जमा थे। जिनका धर्मांतरण कराया जा रहा था। पढ़ें पूरी खबर…


