गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का छत्तीसगढ़ से था खास नाता:पत्नी के इलाज के लिए पेंड्रा अस्पताल आए थे; यहां करीब 81 दिन रहे

छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 164वीं जयंती मनाई गई। विश्व के 500 महानतम कवियों में आठवें स्थान पर रहे टैगोर साहित्य के नोबल पुरस्कार से सम्मानित थे। 7 मई 1861 को कोलकाता के ठाकुरबाड़ी में जन्मे राष्ट्रकवि का छत्तीसगढ़ से विशेष संबंध था। साल 1902 में वे अपनी पत्नी मृणालिनी देवी के इलाज के लिए सेनेटोरियम अस्पताल आए थे। यहां वे करीब 81 दिन रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई कविताओं का लेखन भी किया था। यहां उनकी स्थानीय लोगों के साथ नियमित बैठकें होती थीं। स्टेशन से जुड़ी यादें बिलासपुर रेलवे स्टेशन और पेंड्रा का सेनेटोरियम अस्पताल गुरुदेव की यादों से जुड़े हैं। उन्होंने अपनी बंगला कविता ‘फांकी’ में बिलासपुर स्टेशन की एक घटना का जिक्र किया है। यह घटना 25 रुपए से जुड़ी है, जो उनकी पत्नी ने एक जरूरतमंद महिला की मदद के लिए देने को कहा था। 23 नवंबर 1902 को मृणालिनी देवी के निधन के बाद टैगोर वापस चले गए। लेकिन गौरेला पेंड्रा में उनकी यादें आज भी जीवंत हैं। सेनेटोरियम अस्पताल में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। लाइब्रेरी और म्यूजियम की मांग सेनेटोरियम परिसर में स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पण किया गया। इस अवसर पर पत्रकारों और स्थानीय लोगों ने गुरुदेव के नाम पर लाइब्रेरी और म्यूजियम की मांग की।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *