भारतीय जनता पार्टी में संगठन गठन की प्रक्रिया अब तेजी पर है। दो दिन से मंडल अध्यक्ष चयन को लेकर पार्टी के भीतर मतदान जैसी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सभी शक्ति केन्द्र और बूथ अध्यक्षों से मंडल अध्यक्ष के लिए पर्ची से उनकी राय जानी जा रही है। बीकानेर पूर्व और पश्चिम विधानसभा में राय शुमारी हो गई। अब देहात में वही प्रक्रिया चल रही है। दरअसल भाजपा ने सभी शक्ति केन्द्र और बूथ अध्यक्ष तय कर दिए। अब वही बूथ और शक्ति केन्द्र प्रभारी मंडल अध्यक्षों का चयन करने में जुट गए। बीकानेर पूर्व और पश्चिम विधानसभा मंडल के लिए एक दिन पहले ही पर्ची सिस्टम से नाम जाने गए। फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें पहले से मंडल अध्यक्ष के लिए दावेदार कोई नही आया। शक्ति केन्द्र और बूथ अध्यक्ष से पूछा गया कि आप किसे मंडल अध्यक्ष देखना चाहते हो उसका नाम पर्ची में लिखकर पेटी में डाल दो। ऐसा ही हुआ। शहर की दोनों विधानसभाओं की पेटियां यहां से जयपुर गई। वहां सभी के नामों की सूची बनेगी। जिसे सबसे ज्यादा लोग पसंद करेंगे उसको अध्यक्ष बनाया जाएगा। देहात में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। रविवार को नोखा समेत दो विधानसभाओं में पर्ची से राय जानी गई। पांचों विधानसभाओं से राय लेने के बाद इनकी पेटी भी जयपुर जाएगी। जयपुर में काउंटिंग होने के बाद 26 दिसंबर के बाद मंडल अध्यक्षों के नामों का एलान होगा। इस महीने के अंत तक एक साथ पूरे प्रदेश के मंडल अध्यक्षों का निर्णय होगा। बीकानेर शहर में 10 और देहात में 27 मंडल अध्यक्ष हैं। यानी पूरे जिले में 37 डिग्री मंडल अध्यक्षों के नामों का लोगों को इंतजार है। अब जिन लोगों ने मंडल के लिए पर्ची से अपनी राय पेटी में बंद की है उनको अपने निर्णय का इंतजार है। मंडल के बाद जिलाध्यक्ष की घोषणा मंडल अध्यक्षों के चयन के बाद भाजपा में जिलाध्यक्षों के नामों का एलान होगा। उसके लिए भी प्रदेश स्तर नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि अगर दिसंबर के अंत तक मंडल अध्यक्ष तय हो गए तो मकर संक्राति तक या उसके तुरंत बाद जिलाध्यक्ष घोषित हो जाएंगे। उसको लेकर नामों का मंथन शुरू हो गया है। भास्कर ने पहले ही दावेदारों के नाम बताए थे लेकिन देहात भाजपा में एक नाम अब और तेजी से उभरने लगा है। वो है श्रवण प्रजापत का। हालांकि प्रजापत वर्ग से पहले से ही चंपालाल गेदर प्रदेश ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। खबर है कि जिलाध्यक्ष के लिए गेदर भी जोर मार रहे हैं। अशोक प्रजापत पहले से अपने अलग समीकरण बिछा रहे हैं। अब निर्णय केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल पर होगा क्योंकि इस वक्त जो मेघवाल चाहेंगे जिलाध्यक्ष उसी को बनाया जाएगा। पार्टी के संगठन चुनाव पर दोनों अध्यक्षों ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए प्रभारियों से बातचीत को कहा है। इस बार उम्र भी मायने इस भाजपा में उम्र भी मायने रखी जाएगी। मंडल अध्यक्ष के लिए 30 से 45 साल मानी जा रही है जबकि जिलाध्यक्ष के लिए 35 से 60 साल अध्यक्ष के लिए उम्र निर्धारित की गई है। हालांकि ऐसा भाजपा ने टिकटों के वितरण में भी किया था बावजूद इसके राजस्थान और मध्यप्रदेश में कई जगह उम्र से समझौता किया था। इसलिए इस बार भी कुछ जगह संभव है। पर्ची के अलावा भी नाम संभव भले ही भाजपा ने कार्यकर्ताओं की संतुष्टि के लिए बूथ और शक्ति केन्द्रों से पर्ची से उनकी राय जानी हो पर जरूरी नही जिसे सबसे ज्यादा लोगों ने चाहा हो उसी का नाम अध्यक्ष के लिए आए। क्योंकि पहले तो ये कोई देखने वाला नहीं कि किसके लिए सबसे ज्यादा वोट आए। ये तो जयपुर में ही तय होगा। बीकानेर से तो कोई होगा नहीं। ऐसे में अगर कोई बड़ा नेता किसी एक नाम पर अड़ गया तो भले ही राय किसी और के लिए हो पर मंडल अध्यक्ष वही बनेगा।


