राष्ट्रीय लोक अदालतें आमजन को लंबी कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति दिला रही हैं। इनमें पक्षकारों को आपसी सहमति से त्वरित और सुलभ न्याय मिल पा रहा है। जिला न्यायालय परिसर में रविवार को साल की आखिरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगी। सात घंटे चली इस अदालत में पारिवारिक, लेन-देन सहित विभिन्न तरह के 4 लाख 39 मामलों को सुलझाया गया। इसमें 27 हजार 825 लंबित और 4 लाख 11 हजार 339 प्री-लिटिगेशन के केस शामिल थे। इनमें 29 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित किए गए। साल 2024 में चार राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन हुआ। इनमें कुल 7.94 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा कर 136 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित किए गए। न्यायिक-प्रशासनिक-बैंक और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मध्यस्थता से राजीनामा रविवार को लगी लोक अदालत में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला एवं सेशन जज ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने न्यायिक, प्रशासनिक, बैंक और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ मिलकर पक्षकारों से समझाइश कर राजीनामे से मुकदमों को निस्तारित करवाया। एनआई एक्ट के न्यायालयों में 930 केसों का निस्तारण कर 19 करोड़ के अवार्ड पारित किए गए। मोटर वाहन दुर्घटना अधिकरण में 93 केसों के निस्तारण के साथ पक्षकारों को 5.66 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित किए गए। पारिवारिक न्यायालयों में दंपती और उनके परिजनों से समझाइश कर 355 मामलों को सुलझाया गया। केस निस्तारण के बाद सिविल कोर्ट लौटा देता है फीस एडीजे कुलदीप शर्मा ने बताया कि लोक अदालत में प्रकरण का निस्तारण होने पर सिविल मामलों में न्यायालय फीस लौटाई जाती है। पक्षकार जल्दी न्याय प्राप्त कर मुकदमेबाजी के तनाव से मुक्त हो जाते हैं। पक्षकार लंबित प्रकरणों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में रखवाने के लिए संबंधित कोर्ट से आग्रह कर सकते हैं। लोक अदालत की शुरुआत करते अतिथि। दूसरी लोक अदालत में सर्वाधिक अवार्ड…साल की पहली लोक अदालत 9 मार्च को लगी। इसमें 3950 केस निपटाने के साथ 32 करोड़ के अवार्ड पारित किए गए थे। इसके बाद 13 जुलाई को दूसरी लोक अदालत में 4878 केस निस्तारण के साथ 50 करोड़ के अवार्ड पारित हुए थे। तीसरी लोक अदालत में 28 सितंबर को 3.47 लाख प्रकरणों का निपटारा कर 25 करोड़ के अवार्ड पारित किए गए थे।


