14 फुट ओवर ब्रिज कागजों में:4 से 5 लाख यात्री रोज 1 से 2 किमी पैदल चक्कर काट रहे या फिर जान जोखिम में डाल रोड क्रॉस कर रहे

शहर मे ट्रैफिक समस्या को हल करने और सुचारू ट्रैफिक के लिए योजनाएं तो कई तैयार हो रहीं हैं, लेकिन क्रियान्वयन कागजों से बाहर नहीं आ रही है। ऐसी ही स्थिति शहर के फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) की है। शहर की व्यस्त सड़कों पर पैदल यात्रियों को रोड क्रॉस करने के लिए कई स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज या अंडर पास की जरूरत है। दो साल पहले 14 स्थानों पर बनाने की कवायद शुरू की गई थी। सर्वे के बाद 10 स्थान तय भी हो चुके थे, लेकिन अब तक इनके निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। मात्र तीन या चार स्थानों पर ही यह सुविधा है, लेकिन वहां इतनी उपयोगी नहीं है। फुट ओवर ब्रिज नहीं होने के कारण रोजाना चार से पांच लाख पैदल यात्री आधा किमी से एक-डेढ़ किमी का चक्कर काटकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं या फिर अपनी जान जोखिम में डालकर रोड या डिवाइडर क्रॉस कर रहे हैं। नगर निगम, ट्रैफिक विभाग और ट्रैफिक सुधार के लिए अध्ययन कर रही एजेंसियों की मानें तो शहर में सड़कों पर आवाजाही करने वाले लोगों में से 61 फीसदी लोग पैदल चलते हैं। इनमें से कई लोगों को एक स्थान से दूसरे तक जाने के लिए लोक परिवहन स्टॉप तक पहुंचने या शैक्षणिक संस्थान या दुकान तक आने-जाने के लिए क्रॉसिंग करना पड़ती है, लेकिन चौराहों पर इसमें भी काफी मुश्किल होती है। मुख्य सड़कों पर मिड ब्लॉक नहीं होने से पैदल ही चलना पड़ रहा है। इन पद यात्रियों के लिए शहर में फुट ओवर ब्रिज की जरूरत है। पिछले दिनों ही एसजीएसआईटीएस के स्टूडेंट ने बीआरटीएस पर एक अध्ययन किया था। रोजाना सिर्फ यहां 72 हजार से ज्यादा यात्री परेशान होते हैं। बीआरटीएस के अलावा कई स्थान ट्रांजिट पॉइंट बनते जा रहे हैं। ये ऐसे स्थान हैं, जहां अलग-अलग लोक परिवहन मिलते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए पैदल ही चलना पड़ता है। इसमें विजय नगर, भंवरकुआं, मूसाखेड़ी, दवा बाजार, रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड क्षेत्र, रीगल, सपना-संगीता, एमजी रोड आदि। वहीं मेट्रो के बाद ऐसे पॉइंट में और बढ़ोतरी होगी। जहां बनाए, वह अनुपयोगी… मध्य शहर के साथ सघन रहवासी क्षेत्रों में भारी परेशानी वर्तमान में छप्पन दुकान- कलेक्टोरेट, के फुट ओवर ब्रिज रखरखाव के अभाव में खराब हो गए है। इनका उपयोग भी कम ही हो रहा है। कलेक्टोरेट का ब्रिज तो रात में अंधेरे में रहता है। छप्पन दुकान से अपोलो टॉवर के बीच भी अंधेरा पसरा रहता है। असामजिक तत्वों का भी यहां ढेरा लगा रहता है, इसलिए भी लोग इनका उपयोग नहीं करते हैं। फोटोः संदीप जैन प्रस्तावित भी नहीं बना पाए : सर्वे पूरा हो चुका था फिर भी बात आगे नहीं बढ़ी {वर्तमान में ओल्ड जीडीसी (मोती तबेला), एमवाय हॉस्पिटल के सामने दवा बाजार, आरएनटी मार्ग विवि के सामने, मूसाखेड़ी चौराहे पर दोनों ओर प्रस्तावित हैं। जानकारी के अनुसार इनका सर्वे पूरा कर लिया है। इस बार स्टेप और लिफ्ट के साथ बनाने का प्रस्ताव है।
यहां भी बनना हैं: सी-21 मॉल, एलआईजी गुरुद्वारा, पलासिया, चिड़ियाघर, सपना-संगीता रोड, कोठारी मार्केट के समीप, टॉवर चौराहा से भंवरकुआं चौराहा के बीच, रणजीत हनुमान मंदिर के पास, ग्रेटर कैलाश मार्ग, अन्नपूर्णा मंदिर के पास, रिंग रोड पर बंगाली चौराहा से पीपल्याहाना चौराहा के बीच, आइटी पार्क चौराहा से राजीव गांधी चौराहा के पहले, बीआरटीएस पर कुछ स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज के प्रस्ताव हैं। ट्रैफिक पुलिस का कहना है इन क्षेत्रों में पैदल आवाजाही ज्यादा है, लेकिन विभाग यहां पर स्थान तय नहीं कर पा रहे हैं।
शहर में कई जगह हैं ऐसे हालात यह परेशानी शहर के सिर्फ मध्य क्षेत्र में नहीं, रिंग रोड के साथ बाहरी सड़कों पर भी होने लगी है। कई यात्री ऊंचे डिवाइडरों को लांघने के लिए जान जोखिम में डालते हैं। ऐसे नजारे एमजी रोड, सपना संगीता, आरएनटी व रिंग रोड पर ज्यादा दिखाई देते हैं। फूटी कोठी से गोपुर के बीच पैदल पार करना मुश्किल होता है, क्योंकि यहां डिवाइडर बना दिए है। इसके अलावा कई इलाकों में इस तरह के हालात हैं। समाधान- प्रो. संदीप नारूलकर, एसजीएसआईटीएस, इंदौर एफओबी के लिए ये हैं बड़ी वजहें

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