राजधानी में एक बार फिर ठगों को खाते बेचने वाला गिरोह पकड़ाया है। गिरोह के सदस्य पैन कार्ड, गुमास्ता दस्तावेज बनाने की आड़ में फर्जी ढंग से करंट अकाउंट खोलने के साथ बिजनेस के नाम पर लोगों से खाता किराए पर लेते थे। फिर उन्हें ठगों को बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। ऐसे दो खातों में तीन महीने में 5.56 करोड़ का लेनदेन सामने आया है। गिरोह 120 से ज्यादा खाते देशभर में बेच चुका है। इसका मास्टर माइंड 7वीं पास है।
कोलार पुलिस ने एक महिला सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन खातों में कितना लेनदेन हुआ, पुलिस ने यह जानकारी बैंकों से मांगी है। एडिशनल डीसीपी जोन-4 मलकीत सिंह ने बताया कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने सूचना भेजी थी कि राहुल श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति के कुछ खातों में संदिग्ध लेनदेन हुआ है। राहुल ने पूछताछ में बताया कि उसने 45 हजार रुपए में इन खातों का एक्सेस बिजनेस के लिए घनश्याम सिंगरोले को दिया था। घनश्याम ने बदले में लाखों के मुनाफे का लालच दिया था। घनश्याम ने निकिता और नीतीश से उसका संपर्क कराया था। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। फर्जी खातों के ये तीन अहम किरदार 1. नीतीश शुक्ला- डॉक्यूमेंटेशन की आड़ में फर्जी ढंग से खाते खुलवाता था। इसके बाद इनको ठगों को बेच देता था। 2. निकिता प्रजापति- सीहोर की रहने वाली निकिता ने नीतीश का साथ दिया। दोनों भोपाल में लिव-इन में रह रहे थे। 3. राहुल श्रीवास्तव- कोलार निवासी राहुल 7वीं पास है। खाता बेचने के 3 महीने बाद खाता बंद कराने का आवेदन देने बैंक पहुंचा, तब पूरी कहानी खुली। यह सामान बरामद
77 सिम, 3 मोबाइल स्वाइप मशीन, मशीन रोल पेपर, 7 मोबाइल फोन, 34 क्रेडिट-डेबिट कार्ड, 20 चैक, 24 चेकबुक, 8 पासबुक, सिम रैपर, 2 डायरी, एक कॉपी, 12 एटीएम पिन रैपर, एक लैपटॉप, 2 वाईफाई राउटर और 8 लाख नकदी। तीन ठग और डायरी से खुलेंगे गहरे राज
निकिता और नीतीश ने पूछताछ में बताया, वे खाते सुनील कुमार काकोडिया और निखिल को बेचकर पैसा कमाते थे। अब पुलिस को घनश्याम सिंगरोले, सुनील और निखिल की तलाश है। पुलिस मानकर चल रही है यह अंतरराज्यीय गिरोह है, जो देशभर में ठगी के लिए ठगों को खाते उपलब्ध कराता है। पुलिस को एक डायरी मिली है, जिसमें लेनदेन संबंधी जानकारी है। गिरोह से कई लोगों के नाम से जारी सिम, बैंक पासबुक और चेकबुक मिली हैं। खाताधारक की पत्नी के नाम से फर्जी फर्म भी खोली: जांच में पता चला कि आरोपियों ने राहुल की पत्नी प्रीति के नाम से फर्जी करंट अकाउंट खोलने के साथ फर्जी गुमास्ता-दुकान संस्था का पंजीयन भी कराया था। सिद्धि एंटरप्राइजेज नाम की यह संस्था अस्तित्व में थी ही नहीं। इसकी आड़ में गिरोह पेन कार्ड, गुमास्ता दस्तावेज, फूड लाइसेंस और आईटीआर संबंधी कार्य बताकर फर्जी ढंग से करंट अकाउंट खोल रहा था।


