छत्तीसगढ़ में 1175 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गोठानों का बुरा हाल है। प्रदेश की पिछली सरकार ने गोठान योजना शुरू की। इसके तहत 10240 गोठान समितियां बनाकर उन्हें इसकी गोठान के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी। प्रदेश के गांव-गांव में बनाई गई गोठानों में 24 योजनाओं का पैसा झोंक दिया गया। लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। महिला समूहों ने काम छोड़ दिया है। गोबर खरीदी बंद है। रोजगार सृजन का सपना दम तोड़ चुका है। भास्कर ने प्रदेश के गोठानों का स्टेटस चेक किया। औसतन 11 लाख रुपए से एक गोठान तैयार किया गया। आज स्थिति यह है कि वहां 11 हजार रुपए का सामान भी नहीं बचा है। सोलर लाइट से लेकर शेड तक गायब हो चुके हैं। प्रदेश में 9319 गोठान संचालित अवस्था में थे। इसमें से अब 90 प्रतिशत में ताला लगा है। न यहां जैविक खाद बन रहे हैं और न ही यहां मवेशी रह रहे हैं। सभी जिलों में आदर्श गोठानों में 50 लाख से ज्यादा की रकम खर्च की गई। अब सारे संसाधन खस्ताहाल पड़े हैं। पेंट बनाने का प्लांट बिना उपयोग खराब, बालोद-कवर्धा-धमतरी सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों के गौठानों में प्लांट का यही हाल
बालोद जिले के 179 गांवों में आदर्श गोठान बनाया गया। लगभग 18 करोड़ रुपए खर्च हुआ है। जिले के राधा कृष्णा ग्राम गोठान ग्राम पोण्डी में एक साल पहले जहां मवेशियां दिखाई देते थे, वहां सन्नाटा है।
कवर्धा |जिले में 445 गोठान बनाए गए थे। इन पर 33 करोड़ 29 लाख रुपए से अधिक खर्च हुआ। सभी गोठान वीरान पड़े हैं। यहां महिला समूहों को खाद और चरवाहों को गोबर बेचकर लाभ दिलाने का दावा किया गया था। अब काम छोड़ चुके हैं। धमतरी जिले में 1.9 लाख मवेशियों की देखभाल के लिए 336 गोठान का निर्माण किया गया। इन पर 34 करोड़ 30 लाख रुपए खर्च किए, लेकिन गोठानों की बुरी स्थिति है। भखारा के आदर्श गोठान हंचलपुर में न तो पैरा है न ही पानी। खर्च कर दिए साढ़े 16 करोड़, अब स्ट्रक्चर कबाड़ में बदल चुका
जिले में गोठान के लिए स्ट्रक्चर बनाने में 16 करोड़ 48 लाख रुपए खर्च किए गए। यहां 412 स्थानों पर खाद निर्माण के लिए शेड बनाए गए, जो अब पूरी तरह से कबाड़ हो चुके हैं। ग्राम पंचायत बोदेला के पेटेश्री गोठान में गोबर से खाद बनाने के लिए 25 टांके बनाए गए थे। सभी टांके जर्जर हो चुके हैं। अंबिकापुर में एक गोठान ऐसा जहां सिर्फ उद्घाटन के दिन पहली व आखिरी बार मशीन से तेल निकला, अब गायब खाने का तेल निकालने की मशीन लगाई, अब सिर्फ शेड
अंबिकापुर के आदर्श गोठान सरगांवा में महिलाओं के रोजगार का कोई नामोनिशां नहीं है। मवेशियों के लिए बने शेड अब नशेड़ियों का अड्डा बन चुके हैं। सरसों के तेल उत्पादन के लिए मशीन लगाई गई थी। मुर्गी और बटेर पालन के लिए शेड बनाए गए थे। अब यहां सिर्फ शेड बचे हैं। तेल निकालने की मशीन गायब हो चुकी है। मुर्गियां और बटेर योजना से जुड़े लोग खा गए। सरगांवा गोठान समिति के अध्यक्ष शोभनाथ मरावी ने बताया कि गोठान सीएम ने शुरू किया। उद्घाटन के दिन ही पहली और आखिरी बार तेल निकला। पिछली सरकार में गोठानों के निर्माण में करोड़ों रुपए की राशि खर्च की गई। इस काम में जमकर भ्रष्टाचार हुए है। हम इसकी जांच करा रहे हैं । जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जो भी दोषी होंगे बख्शे नहीं जाएंगे।- रामविचार नेताम, कृषि मंत्री


