अन्नदा कॉलेज की यूआर बनीं डॉ. प्रणिता

भास्कर न्यूज | हजारीबाग विनोबा भावे विश्वविद्यालय ने अन्नदा कॉलेज को परमानेंट एफिलिएटेड श्रेणी का कॉलेज मानते हुए कॉलेज की जीबी में यूनिवर्सिटी रिप्रेजेंटेटिव कानूनय किया है। कॉलेज स्वयं भाषाई अल्पसंख्यक बताते हुए यूनिवर्सिटी रिप्रेजेंटेटिव नहीं मांगा था। वीसी प्रोफेसर दिनेश कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज को एफिलिएटिड श्रेणी का मानते हुए यूनिवर्सिटी रिप्रेजेंटेटिव भेजा है। पीजी रसायन विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रणिता की यूआर मनोनीत किया है। रजिस्ट्रार डॉ. सादिक रज्जाक ने इससे संबंधित अधिसूचना छः मई को जारी कर दिया है, लेकिन अधिसूचना को मीडिया से छुपाया गया। विश्वविद्यालय परिसर में कार्यरत डॉ. प्रणिता को भी अधिसूचना की कॉपी नहीं भिजवाई गई है। अन्नदा कॉलेज अभी तक अल्पसंख्यक कॉलेज का लाभ लेते हुए यूनिवर्सिटी से यू आर नहीं मांगता था। इस मामले में शिकायत मिलने पर विश्वविद्यालय ने कॉलेज की जांच कराई। केंद्र सरकार 2004 से किसी शिक्षण संस्थान को भाषा के आधार पर अल्पसंख्यक घोषित करने की परंपरा को बंद कर दिया है। इसी के बाद से मांग उठी कि कॉलेज में बंगला की पढ़ाई भी नहीं होती तो कॉलेज ने किस आधार पर अल्पसंख्यक का दर्जा लिया था।इस मामले में विश्वविद्यालय ने अपने स्तर से जांच पड़ताल किया तो पता चला कि राज्य बनने से पहले कॉलेज को भाषाई अल्पसंख्यक इकाई का दर्जा मिला था। तत्कालीन रांची यूनिवर्सिटी में इससे संबंधित कोई भी दस्तावेज विनोबा भावे विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराया है। दरअसल किसी भी कॉलेज को अल्पसंख्यक घोषित करने के लिए विश्वविद्यालय के स्तर से जांच समिति गठित की जाती है। अन्नदा कॉलेज के मामले में ऐसा कोई रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के पास नहीं है।

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