पॉलिटिकल एडजस्टमेंट:सरकारों ने बोर्ड बनाए पर बजट नहीं दिया, अध्यक्षों को मंत्री का दर्जा नहीं, अब भाजपा सरकार ने अध्यक्षों की नियुक्तियां की

श्रीमती मनोरमा गुप्ता के पुत्र प्रशांत गुप्ता / स्व. श्रीमती ऊषा दुबे के पुत्र अमिताभ अरुण दुबे की रिपोर्ट भाजपा सरकार ने 36 निगम, मंडल और बोर्ड में अध्यक्षों की नियुक्तियां कर दीं। अध्यक्षों के शपथग्रहण का सिलसिला जारी है। लेकिन आश्चर्य वाली बात ये है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बने 5 ​बोर्ड बीते 4 साल से जीरो प्रोजेक्ट, जीरो वर्क और जीरो रिजल्ट पर खड़े हैं। यानी इनमें कोई काम नहीं हुआ। स्थिति इतनी दयनीय है कि बोर्ड कार्यालय का ताला तक नहीं खुल रहा। पानी पिलाने, झाड़ू लगाने वाला तक कोई नहीं है। जबकि एक-एक बोर्ड को 36-36 लाख रुपए सालाना स्थापना व्यय जारी हुआ। कई बोर्ड में नियमित सचिव तक नहीं है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ नाम के लिए, समाजों को साधने के लिए और नेताओं को संतुष्ट करने के लिए इनका गठन किया गया था। कोई इन बोर्ड से वर्ग विशेष का कोई उत्थान नहीं हुआ। अब नवनियुक्त अध्यक्ष दावा कर रहे हैं कि काम होंगे। भास्कर टीम बीती कांग्रेस सरकार और उसके पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में गठित बोर्ड कार्यालयों तक पहुंची। जो तस्वीरें सामने आईं वे चौकाने वाली हैं।
1. छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड गठन: 6 अगस्त 2021
पता: पुराना पीएससी ऑफिस, सिविल लाइंस रायपुर
नवनियुक्त अध्यक्ष : ध्रुव कुमार मिर्धा
उद्देश्य : चर्म शिल्पियों की पहचान, पंजीयन, प्रशिक्षण, किट और रोजगार मुहैया करवाना। 2. छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड गठन: 6 अगस्त 2021
पता: रवि नगर रायपुर
नवनियुक्त अध्यक्ष : प्रहलाद रजक
उद्देश्य: रजककारों (कपड़ा धोने व प्रेस वाले) की पहचान, पंजीयन, प्रशिक्षण, किट व रोजगार देना। भास्कर टीम को किराए के 2 कमरों में चल रहे बोर्ड ऑफिस में कोई कर्मचारी नहीं मिला। अध्यक्ष का कमरा धूल से सना हुआ था। दफ्तर में कबाड़ पड़ा था। बोर्ड के गठन के बाद कोई प्रोजेक्ट शासन को नहीं भेजा गया।
मौके पर नवनियुक्त अध्यक्ष प्रहलाद रजक मिले। बोले- लक्ष्य युवाओं को ड्राइक्लीनिंग और इससे जुड़े प्रोफेशन में आगे लाना है। स्किल ट्रेनिंग करवाएंगे। मशीनों के लिए लोन मिलेगा। 3. छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड गठन: 6 अगस्त 2021
पता: राज्य निर्वाचन कार्यालय परिषद, मोतीबाग रायपुर
नवनियुक्त अध्यक्ष : जितेंद्र कुमार साहू
उद्देश्य: तेल व्यवसाय से जुड़े लोगों की पहचान, पंजीयन, प्रशिक्षण, किट और रोजगार मुहैया करवाना। तेलघानी बोर्ड में प्रभारी सचिव को छोड़ प्यून तक की नियुक्ति नहीं हो पाई। भास्कर टीम यहां लगातार 2 दिन गई, पर ताला लगा मिला। पिछले टर्म में बोर्ड ने तेलघानी व्यावसायियों के पंजीयन के साथ मशीन, स्किल ट्रेनिंग, घानी के अपग्रेडेशन, पैकेजिंग, मार्केटिंग जैसे कामों का प्लान बनाया था। तेलघानी उद्यम में कच्चा माल मिले, इसलिए कृषि विभाग के साथ तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने की नीति पर काम हो रहा था, पर फंड न मिलने बंद हो गया।
छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड-
गठन- 6 अगस्त 2021, पता- रवि नगर रायपुर
नवनियुक्त अध्यक्ष- प्रफुल्ल विश्वकर्मा। पूर्व अध्यक्ष- लोचन विश्वकर्मा।
उद्देश्य- लौह शिल्पकारों की पहचान, पंजीयन, प्रशिक्षण, किट और रोजगार मुहैया करवाना।
28 अप्रैल, दोपहर 2:30 बजे- बोर्ड कार्यालय में सचिव समेत 2 कर्मचारी मिले। बोर्ड कार्यालय किराए के भवन में चलता है, किराया 24 हजार रुपए है। बीते 4 साल से स्थापना व्यय के लिए सालाना 36 लाख रुपए मिले, लेकिन योजना व्यय मद में एक रुपए नहीं मिला। मिलता कैसे, प्रस्ताव ही नहीं बना। महज 8 सामाजिक बैठकें हुईं। नवनियुक्त अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा कहते हैं- लौह शिल्पियों की पहचान करेंगे, पंजीयन करवाएंगे और फिर लौह शिल्प को मंच देंगे। जितने भी बजट की आवश्यकता होगी सरकार से मांगेंगे। बदलाव दिखेगा।
लोचन विश्वकर्मा, पूर्व अध्यक्ष- फंड नहीं मिला, राज्य मंत्री का दर्जा नहीं मिला। प्यून को 10 हजार रु. मिलते हमारा मानदेय भी 10 हजार रु. था। गाड़ी मैंने अपने पैसे लगवाई। उसका 10 लाख रु. पैमेंट बकाया है। छत्तीसगढ़ केश शिल्पी कल्याण बोर्ड
गठन- 1 जून 2023, पता- गौतम विहार, अमलीडीह रायपुर
नवनियुक्त अध्यक्ष- मोना सेन। वर्तमान अध्यक्ष- नंदकुमार सेन (हाईकोर्ट से स्टे लेकर आए) उद्देश्य- केश शिल्प में संलग्न वर्ग का समग्र उत्थान
29 अप्रैल, दोपहर 3 बजे- केश शिल्पी कल्याण बोर्ड का कार्यालय आप ढूंढते रह जाएंगे। करीब 1 घंटे खोजने के बाद पते तक पहुंचे। बोर्ड किराए की बिल्डिंग में चल रहा है। कार्यालय में एक सदस्य, कम्प्यूटर ऑपरेटर, एक प्यून, एक गार्ड मिले। चूंकि बोर्ड का गठन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के कुछ महीने ही हुआ था, लिहाजा कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ। सरकार ने मोना सेन की नियुक्ति की है, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सेन कोर्ट से स्टे पर हैं, क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था। अध्यक्ष, सदस्य की कुर्सी को लेकर टकराव बना हुआ है। नंदकुमार सेन, अध्यक्ष- सचिव ने शासन को प्रस्ताव नहीं भेजे। ब्यूटीपार्लर के 2 प्रशिक्षण हुए, लेकिन इससे अतिरिक्त कोई काम नहीं हुआ। बोर्ड का मतलब ही क्या है जब समाजहित में कोई काम ही नहीं हो पा रहा हो। अन्य बोर्ड की स्थिति-
खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड- सालाना 20 करोड़ के बजट वाले इस बोर्ड को 4 साल में केंद्र से फंड नहीं मिला। पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी ने बताया कि कई प्रपोजल भेजे। अधिकारियों से मिले, लेकिन खादी बोर्ड मुंबई ने स्वीकृति नहीं दी। पोनी प्लांट व छत्तीसगढ़ की खादी के लिए कर्मशियल कॉम्प्लेक्स के लिए मदद नहीं मिली। हस्तशिल्प विकास बोर्ड- हस्तशिल्प विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष चंदन कश्यप ने बताया कि हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए 20 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र को भेजा गया था। इस प्रोजेक्ट के जरिए हर एक गांव में शिल्पकारों को बढ़ावा देने के लिए काम होना था। प्रोजेक्ट के माध्यम से छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों और उनकी कृतियों को ग्लोबल मार्केट में पहुंचाने का लक्ष्य था। लेकिन तब केंद्र की मदद के बिना ये मुमकिन नहीं हो पाया। अध्यक्षों का दर्द… काम करना चाहते थे, न बजट मिला, न प्रस्तावों को मंजूरी ^सवा साल के कार्यकाल में जितना हो सका उतना काम किया। स्टाफ नहीं, फंड की कमी थी। रीपा के तहत उत्पादन करके, प्रोडक्ट सी-मार्ट तक लाने थे। यह काम नहीं हो पाया।
तरूण बिजौर,, पूर्व अध्यक्ष, चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड मूल काम रीपा के तहत हुआ, बोर्ड के तहत नहीं। हां, बिल्कुल मैंने केबिनेट मंत्री के दर्जा की मांग की थी मगर नहीं मिला। मिलना चाहिए था।
लोकेश कन्नौजे, पूर्व अध्यक्ष, रजककार विकास बोर्ड​​​​​​​ 20 महीने के कार्यकाल में 4 प्रस्ताव विभाग को भेजे, लेकिन अधिकारियों ने मंजूरी नहीं दी। वे बोर्ड को लेकर गंभीर नहीं थे। बजट के नाम पर स्थापना मद ही था।
संदीप साहू, पूर्व अध्यक्ष, तेलघानी विकास बोर्ड बोर्ड के सेटअप
राजनीतिक नियुक्तियां- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या 4 सदस्य। कुल- 5
प्रशासनिक पद- सचिव समेत 7 स्टाफ। इनके स्थापना मद के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकार ने 40 लाख रुपए सालाना का प्रावधान किया था। 36 लाख रु. वेतन में व्यय हो रहे हैं। वर्तमान सरकार ने ​इसे बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दिया है। राज्य मंत्रियों का दर्जा नहीं मिलने से नाराज थे नेताजी
भास्कर पड़ताल में इस बात का भी खुलासा हुआ कि पूर्व की कांग्रेस सरकार में निगम, मंडल, बोर्ड में जिन पार्टी नेताओं की बतौर अध्यक्ष नियुक्तियां हुईं, उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया। इसके चलते इनमें नाराजगी थी। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर पूर्व अध्यक्षों ने इसकी पुष्टि की। अध्यक्ष को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलता है। शेष कोई सुविधाएं नहीं। अगर, राज्य मंत्री का दर्जा मिलता है तो वेतन 1 लाख रुपए मासिक, सरकारी गाड़ी और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। जो नहीं मिलीं। नाराजगी इतनी थी कि इन्होंने प्रोजेक्ट ही नहीं बनाए।

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