विशेष संवाददाता | रांची गुरुनानक सत्संग सभा के हजूरी रागी भाई महिपाल सिंह और उनके साथियों ने भले अमरदास गुण तेरे, तेरी उपमा तोहि बनि आवै…,दरस तेरे की पियास मनि लागी सहज अनंद बसै बैरागी….और रामदास सरोवर नाते सब उतरे पाप कमाते…शबद गाकर गुरु अमर दास की महिमा और उनके जीवन दर्शन का गुणगान किया। अवसर था गुरुनानक सत्संग सभा द्वारा रविवार को कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा में सिखों के तीसरे गुरु श्री गुरु अमर दास के प्रकाशोत्सव का। विशेष दीवान में भाई महिपाल सिंह ने शबद गायन कर संगत को बताया कि गुरु अमर दास ने गुरुनानक देव द्वारा शुरु की गई लंगर सेवा को सामाजिक और जातिगत ऊंच-नीच और भेदभाव को दूर करने के लिए लंगर सेवा का विस्तार किया। मधुर और सुरीली आवाज से सजाए गए विशेष दीवान की शुरुआत उन्होंने आसां दी वार कीर्तन से की। इससे पहले प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में पढ़े जा रहे श्री सहज पाठ के तीन पाठों की समाप्ति हुई। गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह ने कथा के माध्यम से गुर इतिहास सुनाते हुए संगत को बताया कि आज गुरु महाराज का 546वां प्रकाश पर्व है। गुरु अमर दास ने 62 साल की उम्र में गुरु अंगद देव के दर्शन किए और अगले बारह साल तक गुरु महाराज की नि:स्वार्थ सेवा की। श्री अनंद साहिब के पाठ, अरदास और हुकुमनामे के साथ विशेष दीवान की समाप्ति हुई। मौके पर सचिव अर्जुन देव मिड्ढा, मनीष मिड्ढा व अन्य लोग मौजूद थे।


