मैं नवागांव भावगीर का रहने वाला हूं। पिता खेती करते थे, मुझे भी खेती में रुचि थी। इसलिए भिलाई में मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद गांव आकर खेती करने लगा। पिता पारंपरिक खेती करते थे, मैंने उन्नत खेती अपनाई। लेकिन कई कामों में परेशानियां झेलनी पड़ रही थी। मैंने ठान लिया कि एक-एक कर इन परेशानियों का आसान और सस्ता तोड़ खोजूंगा। अपने साथ दूसरे किसानों के लिए भी राहत का रास्ता खोलूंगा। इसमें मेरी मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई बहुत काम आई। मैंने बाजार के मुकाबले 10 गुना तक सस्ते यंत्र बनाए हैं। उन्नत खेती में सबसे बड़ी बाधा है महंगे कृषि उपकरण। जैसे- मशीन से धान, गेहूं आदि फसल काटने पर ईंधन (पेट्रोल-डीजल) खर्च प्रति एकड़ 100 रु. आता है। मैंने बैटरी से चलने वाली मशीन बना दी। इस बैटरी ब्रश कटर से धान-गेहूं आसानी से काट सकते हैं। ईंधन और सर्विसिंग की भी जरूरत नहीं पड़ती। प्रति एकड़ खर्च 10 रु. ही आता है। इस मशीन को लगातार 4-5 घंटे चला सकते हैं। धुआं-प्रदूषण भी नहीं फैलता। इसी तरह, मोबाइल फोन से पंप को कंट्रोल करने का यंत्र बाजार में 35 हजार रु. में मिलता है। यही यंत्र मैं 6-7 हजार रु. में बना रहा हूं। यह मोबाइल नेटवर्क के बिना भी काम करता है। इससे कहीं भी बैठकर मोबाइल के जरिए पंप को चालू या बंद कर सकते हैं। इसके लिए रात को कंट्रोल बॉक्स तक आने की जरूरत नहीं होती। कंट्रोल बॉक्स में लाइन है या नहीं, इसकी सूचना भी मोबाइल पर मिल जाती है। पंप चालू है या बंद, इसका वॉइस मैसेज आ जाता है। बाजार वाली मशीन केवल एंड्रायड फोन से चलती है जबकि यह कीपैड वाले फोन पर भी चल जाती है। किसानों को पशुओं का गर्भाधान भी महंगा पड़ता है। डिजिटल कृत्रिम गर्भधान गन बाजार में डेढ़ लाख रु. की आती है। मैंने यही गन 15-20 हजार में बनाई है। सामान्य विधि से कृत्रिम गर्भाधान में परेशानी होती है और सफलता का प्रतिशत 30 से 33 रहता है। इस उपकरण से गाय-बकरी में यह प्रक्रिया आसानी से हो जाती है। इसमें अब तक के 100 सैंपल में सफलता प्रतिशत 45-50 रहा है।
-जैसा राजेश शर्मा को बताया


