अरगोड़ा स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर में सोमवार को लोगों का भगवान शिव के प्रति एक अलग ही आस्था देखने को मिली। पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए अरगोड़ा के लोगों ने भगवान शिव की आराधना की। सुबह से ही बूढ़ा महादेव मंदिर में शिवभक्तों की कतारें लगी रही। पूरा क्षेत्र मंडा पूजा को लेकर शिव भक्ति में डुबा दिखा। मौके पर धूमधाम से मंडा पूजा को आयोजन किया गया। सोमवार को नौंवे दिन प्रमुख अनष्ठान हुए। इस दौरान 350 सोक्ताइन व 350 भोक्ताओं ने अपनी भक्ति दिखाई। गोस्साई परिक्षित गोस्वामी ने विधिवत पूजन-अर्चना कराई। इस दौरान वो बले शिवा मणि महेश, काशी बजी नाथ, अढाई से जगरन्नाथ, गया गजा ढोल आवे, देवी महादेव, हर हर महादेव, हर हर महादेव …. का मंत्र जाप कर रहे थे। उसके बाद मंदिर परिसर स्थित पीपल के पेड़ के चारों ओर भोक्ताओं ने लेटकर तीन बार परिक्रमा कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। और परिक्रमा करने के बाद शिव जी का आर्शीवाद प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष मुनेश्वर साहु, कार्यकारी अध्यक्ष अंजित साहु, महासचिव पवन साहु, सचिव नरेंद्र प्रसाद साहु, कोषाध्यक्ष शिव प्रसाद, सह कोषाध्यक्ष दिलरंजन साहु का योगदान रहा। बोले भोक्ता… भोक्ता ठुरूकु लोहरा ने बताया कि वो लगभग 20 सालों से पूजा करते आ रहे है। और उनकी आस्था दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि आग पर चलना फूल समान है। दहकते अंगारों पर नंगे पैर चल कर भोक्ताओं ने भोलेनाथ को प्रसत्र किया पांच भोक्ताओं ने फुलखूंदी में जलते हुए आग को हाथों से उठा कर गोसाई को मुख्य मंदिर में ले जाकर हवन के लिए दिया। हवन खत्म होने के बाद गोसाई के आदेश के बाद भोक्ता धुवासी के लिए आग में लकडी के सहारे उलटा लटक गए और आग के आरपार हुए। रात में भोक्ताओं ने अंगारों पर नंगे पैर चल भोलेनाथ को प्रसत्र किया। सोक्ताइन सरिता देवी ने कहा कि कड़ी तपस्या कर भगवान शिव को हम खुश करते है। इस दौरान 9 दिनों के उपवास के साथ हमें कई वस्तुओं का भी त्याग करना पड़ता है। पर हमारी भक्ति में कोई कमी नहीं होती। भोक्ताओं ने मंदिर परिसर में बेंत जोड़ी किया। जिसमें भोक्ताओं ने बेंत को जमीन से छुआते हुए अपने सर के उपर से एक तरफ से दूसरे तरफ करके नाच रहे थे। फिर सभी जमीन पर बैठ कर ढोल-नगाड़े की थाप पर बेंत को बजाने लगे। उसके बाद फुलखुंदी के पास पूजा-अर्चना कर सभी भोक्ताओं को भभूत का टीका लगाया गया। और गोसाई ने सभी भोक्ताओं को पाहन के यहां आग लेने के लिए भेजा, जिससे फूलखूंदी जलाई गई। बेंत जोड़ी के बाद , ढोल की थाप पर झूमे भोक्ता


