सोनहत | सोनहत ब्लॉक के वनांचल इलाकों में इन दिनों तेंदूपत्ता तोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। ग्रामीण सुबह 4 बजे ही पानी और खाने की पोटली लेकर जंगल की ओर निकल जाते हैं। दोपहर बाद लौटते हैं। शाम को तेंदूपत्ता फड़ में बेचते हैं। जंगलों में जगह-जगह लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। तेंदूपत्ता इन ग्रामीणों की आजीविका का बड़ा सहारा है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। राज्य सरकार तेंदूपत्ता के लिए 5500 रुपए प्रति सैकड़ा की दर से भुगतान करती है। इसमें बोनस भी शामिल होता है। इसी वजह से इन दिनों जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने वालों की संख्या बढ़ गई है।


