अंबिकापुर | महामना मालवीय मिशन सरगुजा के तत्वावधान में रविवार को वरिष्ठ लेखापाल अशोक सोनकर के निवास पर गीता पाठ और आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। उद्देश्य था राष्ट्र के कल्याण, आंतरिक शांति और जनमानस में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार करना। कार्यक्रम की शुरुआत गीता के सत्रहवें अध्याय और हनुमान चालीसा के सस्वर पाठ से हुई। उपस्थित गीता प्रेमियों ने लोकमंगल की कामना की। संगोष्ठी में गीता मर्मज्ञ ललित मोहन तिवारी ने कहा, ईश्वर अन्तर्यामी है। सम्पूर्ण सत्ता उसी के अधीन है। उन्होंने बताया, गीता श्रद्धा की ओर प्रेरित करती है। सात्विक, राजसी और तामसिक वृत्तियों की गूढ़ व्याख्या की। शिक्षाविद दुर्गा प्रसाद तिवारी ने कहा, अध्यात्म मनुष्य के स्वभाव से जुड़ा है। भोजन का स्वभाव पर गहरा असर पड़ता है। शुद्ध मन और पवित्र अंतःकरण से किया गया कर्म तपस्या के समान है। यही ईश्वर प्राप्ति का सरल मार्ग है। राजकुमार गुप्ता ने श्रद्धा के स्वरूप और ‘ॐ’ शब्द के ब्रह्मनाद की विस्तृत व्याख्या की। मिशन के सदस्यों ने वीर सैनिकों की शौर्यगाथा को याद कर श्रद्धांजलि दी। देश की एकता और अखंडता के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर आर.एन. अवस्थी, प्रकाश कश्यप, जयप्रकाश चौबे, रामबदन राम, विद्या सोनकर मौजूद रहीं।


