भास्कर न्यूज | राजनांदगांव शहर में संपत्तिकर की डिमांड बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के िलए नगर निगम नए सिरे से सर्वे करेगा। निगम का राजस्व अमला इसकी शुरुआत कर रहा है, जो 31 मई तक चलेगा। इसमें लोगों को एक विवरणिका भरकर अपने प्रॉपर्टी की जानकारी देनी होगी। जिसका भौतिक सत्यापन भी निगम की ओर से किया जाएगा। शहर में लंबे समय से संपत्तिकर के लिए सर्वे नहीं हुआ है। नई प्रॉपर्टी, कालोनी और बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर इसके दायरे से बाहर हैं। जिससे निगम को हर साल बड़ा नुकसान हो रहा है। वहीं जमकर टैक्स चोरी की स्थिति भी सामने आई है। दरअसल निगम ने कुछ समय पहले शहर में प्रॉपर्टी का सर्वे कराया था। जिसमें कई चौंकाने वाली गड़बड़ी सामने आई थी। बड़ी संख्या में ऐसी प्रॉपर्टी हैं, जिसका दायरा 1500 से 2 हजार वर्गफीट तक है लेकिन ये टैक्स सिर्फ 500 वर्गफीट का दे रहे हैं। पुराने सर्वे के मुताबिक ऐसी प्रॉपर्टी की संख्या ही 2 हजार से अधिक है। जिनके नए सिरे से टैक्स का निर्धारण नहीं किया जा सका है। वहीं नई कालोनियों और निर्मित निजी व्यावसायिक परिसरों में भी टैक्स मूल्यांकन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनका भौतिक सत्यापन नहीं हो सका है। जिसे देखते हुए निगम ने नए सिरे से पूरे शहर में प्रॉपर्टी सर्वे की तैयारी की है। पहले खुद ही देंगे जानकारी फिर निगम करेगा सत्यापन निगम की तैयारी है कि अपने टैक्स की जानकारी लोग पहले स्वयं भरकर देंगे। इसके लिए एक स्व विवरणिका तैयार की गई है। जिसमें लोगों को अपने संपत्ति के क्षेत्रफल की पूरी जानकारी देनी होगी। यह काम 31 मई तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। जब यह काम पूरा होगा। इसके बाद निगम भौतिक मूल्यांकन शुरू करेगा। जिसमें निगम की राजस्व टीम खुद ही पहुंचकर प्रॉपर्टी की दी जानकारी का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद दोनों डाटा के मिलान के बाद संपत्तिकर का निर्धारण किया जाएगा। ^ प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर कई तरह की अनियमितता समीक्षा में सामने आई है। इसके चलते डिमांड दुरुस्तीरकण की कार्रवाई शुरू की गई है। लोगों से संपत्ति की जानकारी स्व विवरणिका में भरकर देने के िलए कहा जा रहा है। ताकि सही टैक्स का निर्धारण हो सके। इसके अलावा प्रॉपर्टी का भौतिक मूल्यांकन भी किया जाएगा। अतुल विश्वकर्मा, आयुक्त, नगर निगम निगम की राजस्व टीम ने बीते दिनों टैक्स डिमांड बढ़ाने समीक्षा बैठक की। इसमें सामने आया कि कई मकानें दो से तीन मंजिला बन हैं लेकिन टैक्स पुराना ही दिया जा रहा है। इसी तरह नए बने शोरुम, दुकानों ने भी अपने क्षेत्रफल की जानकारी छिपाकर टैक्स कम कराया है। इसमें राजस्व अमले के कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध है। इसे देखते हुए ही नए सिरे से प्रॉपर्टी टैक्स के सर्वे और मूल्यांकन की तैयारी गई है। ऐसी लापरवाही व टैक्स चोरी से निगम को हर साल बड़ा नुकसान पहुंच रहा है।


