“मैं 2019 से मुंबई में हूं। प्रोडक्शन हाउसेस में कनेक्शन नहीं थे, तो मेरी जगह लोगों ने पहचान वालों को प्रोजेक्ट्स दिए। ऐसा सब फील्ड में होता है। कोविड के समय वेट बढ़ा तो सिर्फ मां के रोल ही ऑफर किए जाते थे। सांवला रंग होने के कारण भी स्ट्रगल करना पड़ा। कुछ डायरेक्टर्स की प्रेफरेंस ही गोरी लड़कियां होती हैं। एक बार तो ऐसा हुआ, दो दिन बाद पेपर साइन होने थे, लेकिन मुझे प्रोडक्शन वालों ने ऐन मौके पर फोन कर कहा – आप की जगह किसी और को ले लिया गया है। उस दिन मैं रातभर रोई। इन सब के चलते एक तरह का अलग मेंटल प्रेशर फेस करना पड़ता है। कई बार सब छोड़कर वापस लौटने का मन हुआ। फाइनली 6 साल और एक हजार से अधिक ऑडिशन देने के बाद रेड 2 मिली। तब समझ आया, सक्सेस इज ए प्रोसेस, एक दिन में नहीं मिलेगी। बस ये है कि आपको जो पसंद वो जारी रखिए। ये स्टोरी छत्तीसगढ़ की श्रुति पांडेय की है। हाल ही रिलीज हुई फिल्म रेड 2 में श्रुति गीता देवी के किरदार में नजर आईं हैं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: मुंबई में अब तक की आपकी स्ट्रगल जर्नी कैसी रही ? जवाब: बहुत टफ थी। मेरे मुंबई जाने के कुछ दिन बाद मेरी बहन मेरे पास आई। वो मेरा फ्लैट देखकर रोने लगी थी। लव आज कल में जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम पर किया। हालांकि उसमें बैकग्राउंड में जो मेरा सीन है, वो ब्लर कर दिया गया है। इसके बाद छोटे-मोटे शूट्स और प्रोजेक्ट्स मिलते रहे। साल 2022 बहुत टफ था। एक तो कोविड के चलते घर पर बैठे–बैठे वेट गेन कर लिया था। बाहर निकली तो सिर्फ मां के रोल ही ऑफर हो रहे थे। कई बार सांवले रंग के प्रोटेक्ट हाथ से निकले। हालांकि इस बीच एक सीरीज मिली। दो दिन कांट्रैक्ट साइन होना था, लेकिन उन्होंने मुझे फोन पर बताया कि मेरी जगह किसी और को ले लिया गया है। मैं उस सिर्फ रोई। सेल्फ डाउट में चली गई, कुछ भी नहीं हो रहा था। कई ऑडिशन में रिजेक्ट हो गई। लगता था कि क्या मैं खूबसूरत नहीं हूं। सोचने लगी कि ये लाइन छोड़कर, कोई नौकरी कर लूं। लेकिन जब सीवी बनाने बैठी तो ख्याल आया कि लड़ना होगा, छोड़ना सही नहीं है। इसके बाद स्ट्रगल जारी रखा। फाइनली 6 साल और 1 हजार से अधिक ऑडिशन देने के बाद रेड 2 मिली। सवाल: गीता देवी के किरदार में चुलबुले पन के साथ गंभीरता भी है, कितना चैलेंजिंग था? जवाब: ये रोल चैलेंजिंग तो था। लेकिन मुझे लगता हम लड़कियों इस मामले गॉड गिफ्टेड हैं। वो पावरफुल तो होती हैं, लेकिन काफी चंचल भी होती हैं। मेरा ओरिजनल कैरेक्टर भी ऐसा है, तो बहुत ज्यादा एफर्ट नहीं डालने पड़े। सवाल: फिल्म में दीवार तोड़ने वाला सीन बहुत हिट रहा, उसके बारे में बताइए? जवाब: ये बहुत मजेदार सीन था। मैं पहली बार स्टंट कर रही थी। डायरेक्टर राज कुमार गुप्ता ने मुझे जब साड़ी में देखा, तो वो थोड़ा संदेह में चले गए। लेकिन मैंने उन्हें कन्वेंस किया कि मैं ये कर लूंगी। दिक्कत ये भी थी कि ये वन टेक शॉट था। जब सेट रेड हो गया तो मैं कुछ दूर से दौड़कर आने वाली थी। लेकिन अजय सर ने एडवाइस दी कि कम स्टेप्स लो। सीन कंप्लीट हुआ तो मुझे समझ आया, उन्होंने कम स्टेप्स वाली सलाह क्यों दी। दूर से आती तो फोर्स ज्यादा लगता और मुझे चोट लग सकती थी। सवाल: फिल्म में बड़े नामों के साथ आपने काम किया, मेंटल प्रेशर था? जवाब: हमेशा माइंड में यही रहता है कि एक चांस मिल जाए तो का खुद को साबित कर देंगे। लेकिन चांस मिल जाता है प्रेशर और बढ़ जाता है। फिर इतने बड़े दिग्गज कलाकार सामने हों तो क्या ही कहने। मेरा फर्स्ट डे का फर्स्ट शूट अमित सियाल सर और अजय सर के सामने था। उस समय मैं बहुत नर्वस थी। मुझे बार–बार लग रहा था कि कहीं मैं डॉयलाग भूल न जाऊं। पर एक–दाे रीटेक तो होते ही हैं। सवाल: इस फिल्म के दौरान सबसे इंपॉर्टेंट लर्निंग क्या रही? जवाब: बहुत सारी चीजें सीखने को मिली। लेकिन जो सबसे इंपॉर्टेंट है, वो ये कि कहां कितनी एनर्जी लगानी है। कई बार ऐसा होता है अपना एक्स्ट्रा एफर्ट डालने लगते हो, लेकिन उसकी जरूरत होती नहीं। मैंने यही सीखा जहां जितनी जरूरत है, वहां उतनी ही ताकत लगाइए। एनर्जी वेस्ट करने की जरूरत नहीं। सवाल: मुंबई में अब तक का सबसे बेस्ट टाइम कौन था, कुछ ऐसा जिसे पाकर आपको, यही चाहिए था? जवाब: अब तक वो नहीं मिला, जो चाहिए था। लेकिन मुंबई आने के छह महीने के बाद मुझे एक प्राइवेट बैंक के शूट के लिए बुलाया गया था। इसके कुछ दिन बाद मेरे एक दोस्त ने बताया कि तुम्हारी फोटो मरीन ड्राइव के पास लगी हुई है। मैं मरीन तुरंत मरीन ड्राइव पहुंची। वहां बैंक के बाहर दीपिका पादुकोण के बगल में मेरा पोस्टर लगा हुआ है। ये एक बड़ा मूवमेंट था मेरे लिए। मैं तब बहुत खुश हुई थी। वो अब तक का बेस्ट मूवमेंट है। मैंने एक्सेप्ट नहीं किया था, कि ऐसा कुछ होगा। सवाल: छत्तीसगढ़ से मुंबई जाने का कब सोचा? जवाब: हम लोग भिलाई में रहते थे। वहां कॉलेज के टाइम बीएसपी में ड्रामा कॉम्पिटिशन में गई। यहां एक दूसरे ग्रुप ने देखा और मुझे अप्रोच किया। मैंने ग्रुप ज्वाइन किया। और ऐसे ड्रामा एक्टिंग शुरू हुई। इस बीच एक लोकल न्यूज चैनल में रिपोर्टर के तौर पर काम किया। फिर भोपाल जाकर ड्रामा स्कूल में एडमिशन में लिया। और इसके बाद मुंबई पहुंची। हालांकि मेरे पापा आर्मी में थे। उन्हें फिल्मों का बहुत शौक था, हम भी साथ में बैठकर देखा करते थे। तब से मेरा इंट्रेस्ट फिल्मों में लेकिन उस ड्रामा कॉम्पिटिशन के करियर के तौर इस लाइन को चुना। सवाल: कैरेक्टर जिसका किरदार आप निभाना चाहती हों? कैरेक्टर जिसके साथ काम करना चाहती हों? जवाब: मैंने ज्यादा सोचा नहीं है, इसके बारे में। लेकिन किसी फाइटर पायलट का कैरेक्टर करना चाहूंगी। काम करने की बात हो तो मैं तिलोत्मा शोम के साथ काम करना चाहूंगी। वो एक बेहतरीन अदाकारा हैं। बहुत बढ़िया काम हैं उनका। तो मुझे उनके साथ काम करना है। सवाल: कोई मैसेज जो आप देना चाहती हों? जवाब: यही कहूंगी, आपको जो पसंद है वही करिए। समय लगता है, लेकिन सक्सेस मिलती है। मुंबई ने बहुत कुछ मुझे सिखाया। रेड 2 के बाद अब ये सोच रही हूं कि आगे क्या होगा? अच्छे प्रोजेक्ट्स मिलेंगे या नहीं। बहरहाल जो भी हो, मैं एक्टिंग करती रहूंगी।


