राष्ट्रीय किसान दिवस पर आज हम आपको पाली के ऐसे हाइटेक किसानों से मिलवाते है जिन्होंने कृषि में नवाचार करते हुए अंगूर, सीताफल, ड्रेगन फ्रूड, अनार पाली की धरती पर उगाए। इसको लेकर उन्हें सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया। इनमें से कई किसान तो ऐसे है जो अब दूसरे किसानों को भी उन्नत कृषि के लिए जागरूक कर रहे है। साथ ही सरकार किसानों को कृषि के प्रोत्साहन के लिए क्या-क्या सुविधाएं और अनुदान दे रही है। वह सबकुछ इस रिपोर्ट में आज जानेंगे। पाली जिले में कृषि की स्थिति
पाली जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्र 12.30 लाख हैक्टेयर है। इसमें से कृषि योग्य भूर्ति 8 लाख 39 हजार 773 हैक्टेयर है। जिसमें से लगभग 80 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जाती है। जिले में मसाले जैसे जीरा मैथी, सौंफ, धनिया एवं अजवायन की लगभग 14000 हैक्टेयर में खेती होती है। खरीफ मे 2800 हैक्टेयर, रबी में 3385 हैक्टेयर जायद में 1003 हेक्टेयर सब्जियों की खेती की जाती है। पाली जिले में सोजत की मेहन्दी नाम से विश्व प्रसिद्ध है। जिले में मेहन्दी की फसल 40 हजार हैक्टेयर में की जाती है। यह भी पढ़े *20 साल पुराना बिजनेस छोड़ बंजर जमीन पर उगाए अंगूर:* दोस्त ने दिया था चैलेंज, अब 20 हजार किलो फसल तैयार; बड़े व्यापारी कर रहे कॉन्टैक्ट यह भी पढ़े – *पुणे में मिठाई का बिजनेस छोड़ पाली में उगाए कश्मीरी-बेर:* बेंगलुरु से लाए 1000 पौधों से की शुरुआत, जानें- कितनी है सालाना कमाई बंजर जमीन पर उगाए अंगूर-बैर
पाली जिला मुख्यालय से महज 25 KM की दूरी पर आबाद बूसी गांव के 53 वर्षीय विजयकुमार चौधरी बूसी गांव स्थित अपने खेत में ढाई बीघा में वर्ष 2022 में कैप्सूल अंगूर की प्रजाति के एक हजार पौधे रोपकर नवाचार किए और अंगूर की अच्छी फसल ले रहे है। इसके साथ ही 12 बीघा में बेर की बालसुंदरी और कश्मीरी रेड एपल किस्म उगाई। इनके नवाचार सक्सेज हुए और अब वे अंगूर और बेर की अच्छी फसल ले रहे है और सालाना लाखों रुपए कमा रहे है। विजय कुमार ने बताया कि इससे पहले वे पूणे में मिठाई की शॉप चलाते थे अब उनके बच्चे संभाल रहे है और वे गांव आकर खेती कर रहे है। इनके इस नवाचार को लेकर हाल ही में सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर बांगड़ कॉलेज में आयोजित प्रोग्राम में जिलास्तर पर उन्हें सम्मानित भी किया गया। यह भी पढ़े – MBA किसान ने बंजर जमीन पर उगाया गोल्डन सीताफल:MNC की जॉब और पत्थर कटिंग का बिजनेस छोड़ा; कमा रहे लाखों का मुनाफा MBA पास किसान, सीताफल उगाकर कमा रहे लाखों रुपए
पाली से 50 किलोमीटर की दूरी पर आबाद देवली पाबूजी नाडोल गांव के किसान नारायण चौधरी एमबीए पास है। पूणे में लाखों का पैकेज छोड़कर उन्होंने खेती करना शुरू किया। देवली पाबूजी गांव के पास 18 बीघा खेत खरीदा और वहां 15 बीघा में गोल्डन सीताफल की किस्म रोपी। आज स्थिति यह है कि सीताफल बेचकर वे सालाना लाखों रुपए कमा कर है। इनके इस नवाचार को लेकर हाल ही में सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर बांगड़ कॉलेज में आयोजित प्रोग्राम में जिलास्तर पर उन्हें सम्मानित भी किया गया।
नितिन कोठारी फेमैली बिजनेस छोड़ बने किसान यह भी पढ़े – *मोबाइल से ऑपरेट करते हैं अनार का बगीचा:* कपड़ों के बिजनेसमैन ने स्पेन से सीखी खेती, घरवाले देते थे ताना अनार बेचकर कमा रहे लाखों रुपए
33 साल के नितिन कोठारी ने कपड़े का अपना फैमेली बिजनेस छोड़कर स्पेन की एक संस्था से तीन माह का ऑनलाइन कोर्स कर अनार की खेती की बारीकियां सीखी। दो साल तक रिसर्च करने के बाद पाली के जाडन के निकट अपने खेत में 16 हेक्टेयर में 15 हजार अनार के पौधे अहमदाबाद से लाकर रोपे। उनके अनार की क्वालिटी इतनी अच्छी होती है कि कम्पनियां यहां आकर खरीदकर ले जाती है। सरकार कृषिकों को प्रोत्साहन के लिए दी रही अनुदान
पाली कृषि विभाग के कृषि अधिकारी बलवीरसिंह मेड़ितया ने बताया किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रशिक्षित करने के लिए समय-समय पर कैम्प आयोजित किए जाते है। किसानों को प्रदेश से भी कृषि के गुर सीखने के लिए भेजा जाता है। इसके साथ ही कई योजनाओं के तहत अनुदान भी दिया जाता है।
राजस्थान सूक्ष्म सिंचाई मिशन – इस योजना में ड्रिप, मिनी फव्वारा एवं फव्वारा संयंत्रों की स्थापना पर लघु सीमान्त एव महिला कृषकों को इकाई लागत का 75 प्रतिशत तथा सामान्य श्रेणी के कृषकों को 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। एक लाभार्थी को अधिकतम 5 हेक्टेयर तक अनुदान देय है।
नींबू, बेर, अनार, आंवला की खेती पर भी अनुदान – योजना के तहत निम्बू, बेर, अनार, आवंला के नए बगीचे लगाने पर इकाई लागत का 75 प्रतिशत अधिकतम 30 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक अनुदान सरकार देती है। यह सहायता कृषकों को तीन किश्तों में उपलब्ध करवाई जाती है। एक लाभार्थी को अधिकतम 4 हेक्टेयर के लिए सहायता दी जाती है। प्रथम वर्ष रखरखाव में 75 प्रतिशत पौधे जीवित होने की दशा में 20 प्रतिशत अनुदान देय है। वित्तीय वर्ष रखरखाव में 90 प्रतिशत पौधे जीवित होने की दशा में 20 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
जल स्त्रोत का निर्माण- राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत कम से कम तीन कृषकों के समूह जिनके पास 10 हेक्टेयर कमाण्ड क्षेत्र हो। 100x100x3 मीटर साइज का फार्म पौण्ड निर्माण पर विभागीय सहायता 20 लाख प्रति इकाई दी जाती है। एकल कृषक को भी 200 हैक्टर क्षेत्र के कमाण्ड एरिया के लिए 20 x 20 x 3 मीटर साईज के फार्म पौण्ड निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 75 हजार रुपए) प्रति इकाई दिए जाते है।
वर्मी कम्पोस्ट स्थापना – जैविक आदान उत्पादन के लिए 30 फीट x 8 फीट x 2.5 फीट आकार के पक्के निर्माण के साथ वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापना पर लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अधिकतम 50 हजार रुपए प्रति इकाई।
प्याज भण्डारण- राष्ट्रीय बागवानी मिशन के योजनान्तर्गत कम लागत की प्याज भण्डारण संरचना की निर्माण लागत 1.75 लाख निर्धारित की गई है। जिस पर 50 प्रतिशत या 87500 रुपए अधिकत्तम सहायता देने का प्रावधान है। यह निर्माण स्थायी प्रकृति का होगा।
ग्रीन हाउस एवं शेडनेट हाउस स्थापना- राष्ट्रीय बागवानी मिशन के योजनान्तर्गत ग्रीन हाउस, शेड नेट हाउस निमार्ण पर सामान्य कृषकों को इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है और लघु सीमान्त अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति कृषकों को इकाई लागत का 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। एक लाभार्थी को अधिकतम 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र के लिए अनुदान दिया जाता है। तथा ग्रीन हाउस में हाईवेजिटेब्लस पौध रोपण पर भी अनुदान दिया जाता है।
प्लास्टिक मल्च एवं लो टनल- प्लास्टिक मल्व की लागत का 50 प्रतिशत या 16 हजार रुपए अधिकतम सहायता का प्रावधान है। एक लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक अनुदान दिया जाता है। लो टनल निर्माण में कृषक को अनुमानित लागत प्रत्ति वर्गमीअर 60 रुपए या लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान देय है। लघु / सीमान्त कृषको को लागत का 75 प्रतिशत अनुदान देय है। एक लाभार्थी को अधिकतम 4 हजार वर्गमीटर तक अनुदान देय है।
खजूर योजना – खजूर टिश्यूकल्चर तकनीक से उत्पादित पौध रोपण पर प्रति पौधा 3 हजार रुपए या प्रति पौधा ईकाई लागत का 75 प्रतिशत अनुदान जो भी कम हो दिया जाता है। एक लाभार्थी को अधिकतम 4 हेक्टेयर तक अनुदान दिया जाता है।
पीएम कुसुम योजना- पीएम कुसुम कम्पोनेन्ट ‘बी’ स्टेण्ड अलोन सौर ऊर्जा आधारित स्वीकृत पम्प योजना 2020-21 में 3 एचपी में, 5. एचपी, 7.5 एचपी तथा 10 एचपी में ईकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अनुसुचित जाति एवं जनजाति श्रेणी के किसानों को 45 हजार का अतिरिक्त अनुदान देय है।


