झारखंड गठन के 24 साल बाद सरकार राज्य में पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज एक्ट (पेसा) को लागू करने की कवायद में जुट गई है। इसके लिए गुरुवार को पेसा नियमावली पर वर्कशॉप में सरकार ने आदिवासी एक्सपर्ट की राय ली। ताकि इसे लागू करने के बाद भविष्य में कोई विवाद न हो। इस वर्कशॉप में आदिवासी एक्सपर्ट और राज्य सरकार के चार मंत्री शामिल हुए। सरकार की ओर से कहा गया कि 1996 का पेसा नियमावली मामूली संशोधन के साथ लागू किया जाएगा। इसमें एक्सपर्ट के सुझावों को भी ध्यान में रखा जाएगा। वर्कशॉप में आदिवासी एक्सपर्ट का कहना था कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में जेपीआरए (झारखंड राज्य पंचायती राज एक्ट 2001) और पेसा एक साथ लागू नहीं किया जा सकता। पेसा को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए जेपीआरए को पूरी तरह खत्म करना होगा। -शेष पेज 11 पर पहले की सरकारों के कारण लागू करने में देरी हुई: दीपक परिवहन मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि हम ऐसी नियमावली लागू करेंगे, जो पूरे देश में मिसाल होगी। सीएम हेमंत सोरेन इसे लेकर गंभीर हैं। देरी के लिए पूर्व की सरकारें दोषी हैं। पिछली सरकारों को बहुत पहले ही इसे लागू कर देना चाहिए था, पर नहीं हुआ। अब हमारी सरकार इसे लागू करने की दिशा में गंभीर है। कार्यशाला में जो भी विचार आए हैं, उसे समाहित करने का प्रयास करेगी। केंद्रीय कानून, राज्य ज्यादा छेड़छाड़ नहीं कर सकता: शिल्पी कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा-पेसा केंद्रीय कानून है, इसमें राज्य चाहकर भी ज्यादा छेड़छाड़ नहीं कर सकता। भ्रम है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में पेसा लागू हो गया तो गैर आदिवासी सदान का क्या होगा। क्योंकि ऐसे क्षेत्र में गैर आदिवासी-मूलवासी और सदान भी रहते हैं। हमें समझना होगा कि आदिवासी सुरक्षित और खुशहाल रहेंगे, तो सभी खुशहाल रहेंगे। ऐसी नियमावली बनाएंगे कि पीढ़ियां याद रखेंगी: दीपिका सरकार की ओर पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा-यह सही है कि झारखंड में 24 साल में यह कानून लागू नहीं हो सका। हम भले ही इसे लागू करने में अन्य राज्यों से पीछे हैं, पर जब लागू होगा तो अग्रणी राज्यों में शुमार होगा। हमारी सरकार 1996 के मूल पेसा कानून में अधिक छेड़छाड़ नहीं करेगी। ऐसी नियमावली बनेगी कि पीढ़ी दर पीढ़ी लोग याद रखेंगे। आम सहमति बनाकर सरकार लागू करेगी: रामदास शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि कानून को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। इसीलिए सरकार इसे दूर करने के लिए खुले मंच पर सभी की राय ले रही है। आम सहमति बनाकर ही इसे लागू करेंगे। जो सुझाव आए हैं, उसे समाहित करने की पूरी कोशिश होगी। विलंब तो हो गया है, लेकिन सरकार इसे लागू करने के लिए सभी को विश्वास में लेना चाहती है।


